मरने से पहले लिखा सुसाइड नोट.. सॉरी मम्मी, इसके सिवा कोई नहीं चारा, मुझे माफ कर देना..
जोधपुर। शहर के रातानाडा स्थित भगवती पौधशाला के पास में रहने वाले एक युवक ने अपने घर में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। घरवालों को पता लगने पर उसे फंदे से उतार कर अस्पताल ले जाया गया। मगर डॉक्टर ने उसे मृत बता दिया। मरने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा और सॉरी मम्मी.. इसके […]
जोधपुर। शहर के रातानाडा स्थित भगवती पौधशाला के पास में रहने वाले एक युवक ने अपने घर में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। घरवालों को पता लगने पर उसे फंदे से उतार कर अस्पताल ले जाया गया।
मगर डॉक्टर ने उसे मृत बता दिया। मरने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा और सॉरी मम्मी.. इसके सिवा कोई चारा नहीं। उसने सुसाइड नोट में एक युवक का जिक्र किया जिससे उसका पैसों को लेकर विवाद चल रहा था।
ये भी पढ़ें आयकर की रडार पर 'कान्हा': 300 अधिकारियों की टीम खंगाल रही दस्तावेज, करोड़ों की कर चोरी का शकवह उसे तंग और परेशान कर रहा था। मृतक के पिता ने इस बारे मेें आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित किए जाने का केस दर्ज करवाया है।
ये भी पढ़ें सादगी की मिसाल: बिना शोर-शराबे के शादी के बंधन में बंधे दो IAS अधिकारी, चर्चा में है 'सिंपल वेडिंग'थानाधिकारी सत्यप्रकाश ने बताया कि भगवती पौधशाला के समीप रहने वाले 22 वर्षीय हनवंतसिंह पुत्र महेंद्रसिंह ने अपने घर में रस्सी से फंदा बनाकर पंखे के हुक में झूल गया। घरवालों को पता लगने पर उसे फंदे से उतार कर अस्पताल लाए मगर डॉक्टर ने मृत बता दिया।
थानाधिकारी सत्यप्रकाश के अनुसार घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें उसने किसी महेंद्र भाटी से लेन देन की बात लिखी है। साथ ही मम्मी सॉरी.. इसके सिवा कोई चारा नहीं . मुझे माफ कर देना।
घटना के संबंध में आज मृतक के पिता महेंद्र सिंह ने आत्महत्या के लिए दुष्पे्ररित किए जाने का केस दर्ज करवाया है। जिस बारे में अनुसंधान किया जा रहा है। शव को कार्रवाई कर परिजन के सुपुर्द कर दिया गया है।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां