जिलाधिकारी के नाम से फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट, साइबर सेल कर रही जांच
चंपावत। चम्पावत जिले में साइबर अपराधियों ने जिलाधिकारी मनीष कुमार की तस्वीर का दुरुपयोग कर फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बना लिया। इस अकाउंट से जिले के अधिकारियों को अंग्रेज़ी में संदेश भेजकर संपर्क साधने की कोशिश की गई, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया।
बुधवार को वियतनाम के +84 नंबर से कई अधिकारियों को व्हाट्सएप संदेश प्राप्त हुए। जब प्रोफाइल की जांच की गई तो उसमें जिलाधिकारी मनीष कुमार की तस्वीर लगी हुई थी। विदेशी नंबर होने के कारण अधिकारियों को तुरंत संदेह हुआ।
ये भी पढ़ें दिल्ली: लद्दाख बुद्ध विहार को मिला फुटओवर ब्रिज का तोहफा, सीएम रेखा गुप्ता ने किया शिलान्यासवन विभाग के एसडीओ सुनील कुमार को भी इसी नंबर से ‘हैलो’ का संदेश मिला। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना जिला सूचना अधिकारी (डीआईओ) धीरज कार्की को दी। इसके बाद संबंधित नंबर को ब्लॉक कर मामले से जिलाधिकारी को अवगत कराया गया।
ये भी पढ़ें जयशंकर ने फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चाजिलाधिकारी मनीष कुमार ने तुरंत लोगों से अपील की कि इस तरह के किसी भी संदेश को नजरअंदाज करें। उन्होंने फर्जी अकाउंट का स्क्रीनशॉट अपने व्हाट्सएप स्टेटस पर साझा कर सभी को सतर्क रहने के निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
पुलिस के अनुसार, मामला साइबर सेल को सौंप दिया गया है और जांच जारी है। गौरतलब है कि इससे पहले अगस्त 2024 में भी तत्कालीन जिलाधिकारी नवनीत पांडेय के नाम से फर्जी व्हाट्सएप आईडी बनाकर अधिकारियों से पैसे मांगने का मामला सामने आया था। वहीं, कुछ वर्ष पूर्व पूर्व सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी के नाम से भी इसी तरह की ठगी की कोशिश हो चुकी है, जिसमें कुछ लोग ठगों के झांसे में आकर रकम भेज चुके थे।
प्रशासन ने आम जनता और अधिकारियों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और तुरंत संबंधित विभाग या पुलिस को इसकी सूचना दें।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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