महाशिवरात्रि 2026 का महासंयोग, चार प्रहर पूजा का सही समय जानिए और पाएँ भगवान शिव की विशेष कृपा
महाशिवरात्रि शिव भक्तों के लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि आस्था भक्ति और आत्मिक शांति का महापर्व है। पूरे साल जिस दिन का इंतजार श्रद्धालु सबसे ज्यादा करते हैं वह दिन महाशिवरात्रि होता है। यह वही पावन तिथि है जब भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन शिव भक्ति का हर क्षण खास माना जाता है और रात भर जागरण कर भगवान भोलेनाथ की आराधना की जाती है।
महाशिवरात्रि 2026 की सही तिथि और व्रत का महत्व
निशिता काल पूजा का विशेष महत्व
महाशिवरात्रि की रात का सबसे पवित्र समय निशिता काल माना जाता है। यही वह समय है जब भगवान शिव की विशेष साधना और पूजा की जाती है। मान्यता है कि निशिता काल में किया गया अभिषेक और मंत्र जाप कई गुना फल देता है। इस वर्ष निशिता काल पूजा का समय रात 12 बजकर 28 मिनट से 1 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। इस दौरान शिवलिंग पर जल बेलपत्र और दूध अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है।
महाशिवरात्रि 2026 चार प्रहर पूजा का समय
महाशिवरात्रि की रात चार प्रहरों में विभाजित होती है और हर प्रहर में भगवान शिव की पूजा का अलग महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार चारों प्रहर में पूजन करने से जीवन में सुख शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। नीचे महाशिवरात्रि 2026 के चार प्रहर पूजा के समय दिए गए हैं
• प्रथम प्रहर पूजा समय 06 बजकर 39 मिनट से 09 बजकर 45 मिनट तक
• द्वितीय प्रहर पूजा समय 09 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
• तृतीय प्रहर पूजा समय 12 बजकर 52 मिनट से 03 बजकर 59 मिनट तक
• चतुर्थ प्रहर पूजा समय 03 बजकर 59 मिनट से 07 बजकर 06 मिनट तक
इन चारों प्रहरों में भोलेनाथ और माता पार्वती की उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
व्रत पारण का शुभ समय
महाशिवरात्रि व्रत का पारण 16 फरवरी को किया जाएगा। पारण का शुभ समय सुबह 7 बजकर 6 मिनट से दोपहर 3 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पारण सही समय में ही करना चाहिए ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
महाशिवरात्रि पर पूजा विधि का भाव
इस दिन शिवलिंग पर जल चंदन दूध और बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही भगवान शिव और माता पार्वती के दर्शन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किया गया यह व्रत जीवन के दुखों को दूर कर शांति और सफलता का मार्ग खोल देता है।
Disclaimer
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित है। तिथि और समय में स्थान के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। किसी भी धार्मिक कार्य से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान से पुष्टि अवश्य करें।
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लेखक के बारे में
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