महाशिवरात्रि 2026: 300 साल बाद बन रहे पांच दुर्लभ राजयोग, 15 फरवरी को मिलेगा शिव कृपा का विशेष अवसर
महाशिवरात्रि का पावन पर्व हर भक्त के लिए आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा दिन होता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि 15 फरवरी को फाल्गुन कृष्ण पक्ष में मनाई जाएगी। इस वर्ष का यह पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि ज्योतिष गणनाओं के अनुसार करीब 300 साल बाद एक साथ पांच दुर्लभ राजयोग बन रहे हैं। यह अद्भुत संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
शिवलिंग को पांच तत्वों आकाश वायु अग्नि जल और पृथ्वी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए इस दिन शिवलिंग का अभिषेक विशेष पुण्यदायी माना जाता है। दूध दही शहद घी और चीनी से पंचामृत अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष महाशिवरात्रि का शुभारंभ 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट से होगा और 16 फरवरी को शाम 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस पवित्र रात्रि में पूजा और जाप का विशेष महत्व माना गया है। भक्तों का विश्वास है कि इस रात की गई आराधना कई गुना फल देती है।
300 साल बाद बन रहे पांच दुर्लभ राजयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस बार महाशिवरात्रि पर पांच अद्भुत राजयोग एक साथ बन रहे हैं। बुध और शुक्र के संयोग से लक्ष्मी नारायण राजयोग बन रहा है। बुध और सूर्य के मेल से बुधादित्य राजयोग बन रहा है। सूर्य और शुक्र के मिलन से शुक्रादित्य योग बन रहा है। कुंभ राशि में शनि शश महापुरुष राजयोग बना रहे हैं। साथ ही सूर्य बुध शुक्र शनि और राहु के एक साथ होने से पंचग्रह राजयोग का निर्माण हो रहा है।
इन सभी शुभ योगों का एक साथ बनना अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार यह संयोग आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है। कई राशियों के लिए यह समय विशेष रूप से फलदायी साबित हो सकता है।
कैसे करें भगवान शिव को प्रसन्न
महाशिवरात्रि के दिन सुबह स्नान के बाद शिव मंदिर में जाकर जल और पंचामृत से अभिषेक करना शुभ माना जाता है। बेलपत्र धतूरा और सफेद फूल अर्पित करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। सच्चे मन से मंत्र जाप और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
यह पावन रात्रि केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आत्म शुद्धि और आंतरिक जागरण का अवसर है। श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा से जीवन में शांति खुशी और समृद्धि आने की मान्यता है।
Disclaimer यह लेख धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। विभिन्न परंपराओं और पंचांग के अनुसार तिथि और योग में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान से पहले विद्वान आचार्य या आधिकारिक पंचांग से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
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