संभल में सरकारी जमीन हो रही कब्जामुक्त, बुलडोजर के डर से लाेग खुद हटा रहे दीवारें, जिलाधिकारी बोले- जारी रहेगी कार्रवाई
संभल। उत्तर प्रदेश की याेगी सरकार सरकारी जमीनाें पर कब्जा करने वालाें काे तेजी और सख्ती से सबक सिखा रही है। सबसे ताजा उदाहरण आज जनपद संभल में सरकारी जमीन पर बने मदरसे को ढहाना है। वैसे तो संभल में सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासन का बुलडाेजर एक्शन 24 नवंबर 2024 से लगातार जारी है और कई जगह तो लाेग खुद कब्जा हटाने के लिए मजबूर हैं। प्रशासन खाली कराई जा रही जमीन गरीबों को पट्टे पर भी दे रहा है।
इसी क्रम में अबतक संभल जिला प्रशासन की ओर से सरकारी और तालाब जैसी सार्वजनिक भूमि पर बने कई अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। साथ ही अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद और मदरसों पर भी कार्रवाई की गई है। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन ने पत्ते वाली सरकारी जमीन और अन्य सार्वजनिक भूमि को अवैध कब्जे से भी मुक्त कराया। जिला प्रशासन ने सलेमपुर सलार गांव में सरकारी जमीन पर बने मस्जिद और मदरसे को हटाकर कब्जा मुक्त कराई गई 1.5 बीघा जमीन को गरीब, भूमिहीन लोगों को पट्टे आवंटित कर एक लोकहितैषी प्रशासन का उदाहरण पेश किया।
ढहाए गए बारातघर एवं मकानजिला प्रशासन ने संभल सदर तहसील क्षेत्र के गांव बिछौली गांव में भी सरकारी जमीन पर बने मकान पर कार्रवाई की थी, जिसमें गांव के प्रधान का मकान भी शामिल था। प्रशासन ने राया बुजुर्ग गांव में भी सरकारी जमीन पर बने बारात घर व मस्जिद के विरुद्ध जिला प्रशासन का बुलडोजर गरज चुका है। कई गांवाें में लाेग बुलडाेजर की कार्रवाई के डर से खुद अपना अपना कब्जा हटा रहे हैं। प्रशासन भी ऐसे लाेगाें काे समय दे रहा है कि वे अपना सामान निकाल लें और कब्जा हटाएं।
आवासों को कराया गया कब्जा मुक्तप्रशासन ने चंदौसी तहसील क्षेत्र के नखासा में कांशीराम आवासीय योजना के तहत बने 108 आवासों को भी कब्जा मुक्त कराया था। आज का मामला जनपद संभल की चंदौसी तहसील क्षेत्र की नगर पंचायत नरौली से जुड़ा हुआ है। जहां पर आज सुबह प्रशासन की टीम दो बुलडोजर लेकर पहुंची और सरकारी खाद के गड्ढे तथा रास्ते की भूमि पर बने मदरसे को जमींदोज करने की कार्रवाई की गई। साथ ही वहां पर बने मकानों को भी नोटिस जारी किए गए।
क्या बोले जिलाधिकारीजिलाधिकारी राजेंद्र पैंसिया ने हिन्दुस्थान समाचार से बातचीत में कहा कि सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा करने वालों की खैर नहीं है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि जहां-जहां पर सरकारी लैंड पर, रास्ते पर, चकरोड पर, तालाब पर, खलिहान पर, चारगाह पर, सरकारी खाद के गड्ढों की जमीन पर कब्जे हैं वहां पर कब्जा मुक्ति की कार्रवाई निरंतर गतिमान है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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