मेरठ पुलिस का काला चेहरा बेनकाब: वर्दी में दरिंदगी, 2 दरोगाओं ने सूत कारोबारी से 21 लाख लूटे, दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
मेरठ। जिस वर्दी को आम आदमी सुरक्षा की गारंटी मानता है, वही वर्दी मेरठ में खौफ और लूट का औज़ार बन गई। यूपी पुलिस के दो दरोगाओं ने सूत कारोबारी को अगवा कर न सिर्फ़ अमानवीय यातनाएं दीं, बल्कि रासुका और फर्जी आतंकी मामलों में फंसाने की धमकी देकर उससे 21 लाख रुपये की रंगदारी वसूल ली। मामला जब आला अफसरों तक पहुंचा तो पूरी पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
घटना लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र की है। इस्लामाबाद रिक्शा रोड निवासी रासिख पुत्र स्व. इदरीश, जिनकी दक्षिणी इस्लामाबाद में एमएसआरएस टैक्सटाइल नाम से फर्म है, नौचंदी के पास से अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। तभी आजाद रोड पर एक कार आकर रुकी। कार में लोहियानगर थाने की बिजली बंबा चौकी पर तैनात दरोगा लोकेंद्र साहू और मुकेश कुमार मौजूद थे।
जबर्दस्ती कार में डाला, रासुका लगाने की धमकी
आरोप है कि एक दरोगा नीचे उतरा और रासिख को जबरन कार में खींच लिया। धमकाते हुए कहा— “फंडिंग करता है तू… रासुका लगाकर सड़ा देंगे।” इसके बाद कारोबारी को हापुड़ ले जाया गया। रास्ते भर बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
हापुड़ पहुंचकर दरोगाओं ने कारोबारी को गोली मारने की धमकी दी और मोबाइल से वीडियो बनाते हुए जबरन कहलवाया कि उसके फोन में विदेशी खाते हैं और वह हवाला के जरिए फंडिंग करता है। डर और दहशत में रासिख टूट चुका था।
50 लाख की मांग, फिर 20 लाख पर सौदा
दरोगाओं ने पहले 50 लाख रुपये की मांग की और कहा— “पैसा आया तो छोड़ देंगे, नहीं तो गोली मारकर जेल भेज देंगे।” जब कारोबारी ने इतनी रकम एक साथ देने में असमर्थता जताई तो मांग घटाकर 20 लाख रुपये कर दी गई।
रासिख ने अपने बहनोई नईम को फोन कर मदद मांगी। इसके बाद उसे कार में ही बंधक बनाकर अलीपुर चौराहे के सुनसान इलाके में खड़ा रखा गया। नईम अपने एक रिश्तेदार के साथ 14 लाख रुपये लेकर पहुंचा और बैग दरोगाओं को सौंप दिया। छह लाख कम बताकर जल्द इंतजाम करने की धमकी देते हुए दरोगा रासिख को वहीं छोड़कर चले गए।
दूसरी किश्त, फिर एक लाख और वसूला
9 दिसंबर की दोपहर फिर फोन आया। इस बार छह लाख रुपये लेकर अलीपुर के जंगल बुलाया गया। रुपये देने के बाद जब रासिख लौटने लगे तो दरोगा बोला— “कल की रकम में एक लाख कम है, कल नौचंदी मैदान पहुंच जाना।” अगले दिन वह एक लाख रुपये भी दे आया।
इसके बाद जाते समय दोनों दरोगाओं ने फिर आवाज लगाकर बुलाया और खुली धमकी दी—
“मुंह खोला तो अंजाम भुगतने को तैयार रहना। तेरी वीडियो हमारे पास है। वायरल कर देंगे, दिल्ली ब्लास्ट में फंसा देंगे।”
डर और सदमे में कारोबारी को छोड़ दिया गया।
शिकायत पहुंची अफसरों तक, जांच में आरोप सही
रिहा होने के बाद रासिख ने हिम्मत जुटाकर पुलिस अफसरों से शिकायत की। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह के नेतृत्व में गठित जांच टीम ने पूरे मामले की पड़ताल की। जांच में आरोप पूरी तरह सही पाए गए और रिपोर्ट आला अफसरों को सौंप दी गई।
मामले के उजागर होते ही दोनों दरोगा अंडरग्राउंड हो गए। हालांकि सूत्रों का कहना है कि पूछताछ के लिए उन्हें कुछ समय हिरासत में भी लिया गया था।
SSP का एक्शन: दोनों दरोगा सस्पेंड, FIR दर्ज
मंगलवार सुबह SSP अविनाश पांडेय ने दरोगा लोकेंद्र साहू और मुकेश कुमार को सस्पेंड कर दिया। दोनों के खिलाफ रंगदारी, अपहरण, धमकी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुकदमा दर्ज होते ही दोनों फरार हो गए, जिनकी तलाश में दबिश दी जा रही है।
SSP अविनाश पांडेय ने बताया कि शुरुआत में सूचना मिली थी कि नकली पुलिसकर्मी बनकर कारोबारी से 21 लाख की लूट हुई है, लेकिन जांच में सामने आया कि यह वारदात खुद पुलिस के दरोगाओं ने अंजाम दी।
SHO पर भी सवाल, विभागीय जांच के आदेश
मामले में लोहियानगर थाना प्रभारी योगेश चंद्र की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। SSP ने SHO के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
सवालों के घेरे में पुलिस व्यवस्था
यह घटना न सिर्फ़ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर शिकायत न होती तो शायद यह वर्दीधारी लूट कभी सामने ही न आती। मेरठ में वर्दी का यह खौफनाक चेहरा आम आदमी के भरोसे पर सीधा हमला है।
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