मौलाना मदनी का बड़ा बयान, कहा- 'मुसलमान नहीं गा सकता वंदे मातरम्', देशभक्ति के नाम पर न हो राजनीति
सहारनपुर। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने वंदे मातरम् को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान देकर नई बहस छेड़ दी है। सहारनपुर में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना मदनी ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक मुसलमान किसी भी कीमत पर वंदे मातरम् नहीं गा सकता क्योंकि यह उनके धार्मिक अकीदे और इस्लाम के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने इस मुद्दे को देशभक्ति से जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि किसी पर अपनी पसंद थोपना भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत है और यह देशभक्ति नहीं बल्कि केवल राजनीति है।
मौलाना मदनी ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत या वंदना करना वर्जित है। वंदे मातरम् का अर्थ धरती या मातृभूमि की पूजा से जुड़ा है जिसे मुस्लिम समुदाय स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने तर्क दिया कि किसी गीत को न गाने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह व्यक्ति अपने देश से प्रेम नहीं करता। मदनी ने कहा कि मुसलमान इस मुल्क से बेपनाह मोहब्बत करते हैं और इसकी आजादी के लिए उन्होंने बड़ी कुर्बानियां दी हैं लेकिन इबादत सिर्फ ईश्वर की ही होगी।
संविधान देता है अपनी पसंद का अधिकार
मौलाना मदनी ने सरकार और राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज के दौर में देशभक्ति का प्रमाण देने के लिए प्रतीकों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और अपनी मान्यताओं के अनुसार जीने की आजादी देता है। किसी भी व्यक्ति को उसकी मर्जी के खिलाफ कोई विशेष गीत गाने के लिए मजबूर करना संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ शक्तियां जानबूझकर ऐसे मुद्दे उछालकर समाज में विभाजन पैदा करना चाहती हैं और अल्पसंख्यकों को निशाना बना रही हैं।
राजनीतिक रोटियां सेंकने का लगाया आरोप
मदनी ने अपने संबोधन में साफ किया कि वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने की कोशिशें केवल राजनीतिक लाभ के लिए की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि देश के वास्तविक मुद्दों जैसे बेरोजगारी और महंगाई से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर ऐसे भावनात्मक विवाद खड़े किए जाते हैं। मदनी के इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। दक्षिणपंथी संगठनों ने मदनी के इस रुख की आलोचना करते हुए इसे राष्ट्रविरोधी मानसिकता बताया है जबकि जमीयत अपने रुख पर कायम है। फिलहाल इस बयान के बाद जनपद में सुरक्षा और सतर्कता बढ़ा दी गई है।
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लेखक के बारे में
गौरव सिंघल सहारनपुर के एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जो पिछले 18 वर्षों (2007 से) से मीडिया जगत में सक्रिय हैं। पत्रकारिता की बारीकियां उन्होंने विरासत में अपने पिता के मार्गदर्शन में 'अमर उजाला' और 'हिन्दुस्तान' जैसे संस्थानों से सीखीं।
अपने लंबे करियर में उन्होंने इंडिया टुडे (फोटो जर्नलिस्ट), शुक्रवार, इतवार, दैनिक संवाद और यूपी बुलेटिन जैसे दर्जनों प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दीं। लेखनी के साथ-साथ कुशल फोटो जर्नलिस्ट के रूप में भी उनकी विशिष्ट पहचान है।
विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में अनुभव प्राप्त करने के बाद, वर्तमान में गौरव सिंघल सहारनपुर से 'रॉयल बुलेटिन' के साथ जुड़कर अपनी निष्पक्ष और गहरी रिपोर्टिंग से संस्थान को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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