समाज और परिवार में सुख, शांति और आत्मीयता का विकास
सच्चे और स्थायी रिश्ते केवल स्वार्थ और व्यवसायिकता से नहीं बनते। हमारा नश्वर शरीर जितना भौतिक कार्यों में उपयोगी हो, उतना ही पुण्य और परमार्थ के कार्यों में योगदान देना उसे अमरता देता है। भौतिक प्रगति तो हासिल की जा सकती है, लेकिन यदि परमार्थ और मानवता का कार्य नहीं किया गया, तो जीवन की वास्तविक उन्नति अधूरी रहती है।
हमारी समृद्धि और शांति तभी स्थायी हो सकती है जब हम विचारों की श्रेष्ठता के साथ आत्मीयता, भाईचारा, त्याग, समर्पण, मितव्ययिता, परिश्रम और निष्ठा का पालन करें। समय की कमी के बावजूद यदि हम अपने परिवार और समाज के प्रति थोड़ा समय दें, तो निश्चित ही हम सुख और शांति का अनुभव कर सकते हैं और समाज में आदर्श स्थापित कर सकते हैं।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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