सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका खारिज की..जारी रहेगी महाभियोग की कार्यवाही
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय के जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज जस्टिस वर्मा को उनके पद से हटाने के लिए लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित कमेटी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने 8 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जस्टिस वर्मा का कहना था कि जब 21 जुलाई को लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में जस्टिस वर्मा को पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया गया था, तो ऐसी सूरत में जजेज इन्क्वारी एक्ट के तहत आगे जांच के लिए दोनो सदन की संयुक्त कमेटी का गठन होना चाहिए था। ऐसे में लोकसभा स्पीकर की ओर से कमेटी का गठन गलत है।
जस्टिस वर्मा की याचिका में कहा गया था कि जजेज इन्क्वायरी में साफ तौर पर उल्लेख है कि अगर किसी जज को हटाने का प्रस्ताव एक ही दिन में संसद के दोनों सदन में पेश किया जाता है, तो संसद के दोनों सदन में प्रस्ताव स्वीकार किये जाने के बाद स्पीकर और चैयरमेन एक संयुक्त कमेटी का गठन करेंगे। जस्टिस वर्मा का कहना था कि जब उन्हें हटाने का प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में एक ही दिन पेश हुआ, तो राज्यसभा में उस पर कोई फैसला न लिए जाने पर भी लोकसभा स्पीकर ने कैसे कमेटी का गठन कर दिया।
उच्चतम न्यायालय ने 22 मार्च को इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी के गठन का आदेश दिया था। इस जांच कमेटी में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय के जज जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे।
जस्टिस यशवंत वर्मा जब दिल्ली उच्च न्यायालय के जज थे उस समय उनके घर पर 14 मार्च को आग लगने के बाद अग्निशमन विभाग ने कैश बरामद किया था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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