हल्की खांसी भी बन सकती है फेफड़ों के कैंसर का कारण, आयुष मंत्रालय ने बताए लक्षण
नई दिल्ली। डायबिटीज और थायराइड इस वक्त तेजी से बढ़ती बीमारियों में से एक हैं, जहां हर 10 में से 7 लोग डायबिटीज और थायराइड से पीड़ित हैं और कुछ को पता नहीं है कि वे इन बीमारियों से ग्रस्त हैं। डायबिटीज और थायराइड के बाद देशभर में फेफड़ों का कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। आईसीएमआर की रिपोर्ट की मानें तो साल 2025 में 81,219 पुरुष और 30,109 महिलाओं में नए कैंसर के मामले दर्ज किए गए हैं।
अब जानते हैं कि फेफड़ों का कैंसर क्या है। सामान्य रूप से फेफड़ों की कोशिकाएं विभाजित होकर अलग सेल्स या कोशिकाएं बनाती हैं, और ये बहुत ही सामान्य प्रक्रिया होती है, लेकिन कई बार टूटकर नई बनने वाली कोशिकाओं में अनियमित परिवर्तन देखे जाते हैं, जो ट्यूमर का रूप ले लेती है और अंग को ठीक से काम नहीं करने देगी। फेफड़ों में मुख्यत: दो प्रकार के कैंसर होते हैं। पहला है नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर और दूसरा स्मॉल सेल लंग कैंसर। भारत में नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर के केस ज्यादा देखने को मिलते हैं और सही समय पर इसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन स्मॉल सेल लंग कैंसर शरीर के हर हिस्से में तेजी से फैलता है और ये नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर की तुलना में ज्यादा खतरनाक होता है।
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रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

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