प्राकृतिक दिनचर्या: स्वस्थ, संतुलित एवं तनावमुक्त जीवन की आधारशिला
नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर अपने शरीर और मन की जरूरतों को नजरअंदाज कर देते हैं। देर रात तक जागना, अनियमित भोजन, मोबाइल और स्क्रीन पर ज्यादा समय और लगातार तनाव, ये सब धीरे-धीरे हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे समय में प्राकृतिक दिनचर्या हमें फिर से संतुलन की ओर ले जाती है। यह कोई कठिन नियमों वाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि प्रकृति की लय के साथ जीने का एक सहज तरीका है।
यह एक तरह से खुद को समय देने का सुंदर तरीका है। भोजन के मामले में प्राकृतिक दिनचर्या हमें सादगी सिखाती है। समय पर, जरूरत के अनुसार और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। बहुत ज्यादा तला-भुना, जंक फूड या देर रात खाना शरीर को भारी और सुस्त बना देता है। मौसम और अपनी क्षमता के अनुसार भोजन चुनना ही समझदारी है। पानी भी समय-समय पर पीते रहना चाहिए, न बहुत कम और न ही जरूरत से ज्यादा। शारीरिक गतिविधि और विश्राम, दोनों का संतुलन बहुत जरूरी है। रोज थोड़ा-बहुत व्यायाम शरीर को मजबूत बनाता है, वहीं रात में 6 से 8 घंटे की अच्छी नींद शरीर और दिमाग को पूरी तरह आराम देती है। दिन में बार-बार सोने की आदत से बचना चाहिए, जब तक कि शरीर इसकी मांग न करे।
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लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

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