हरड़ को क्यों कहा जाता है अमृत? आयुर्वेद से जानिए चमत्कारी फायदे
नई दिल्ली। आयुर्वेद में हरड़ (हरितकी) को 'अमृत' के समान माना गया है। इसकी वजह यह है कि हरड़ सिर्फ किसी एक बीमारी पर काम नहीं करती, बल्कि पूरे शरीर को भीतर से संतुलित और मजबूत बनाती है। चरक संहिता में इसे त्रिदोष नाशक बताया गया है, यानी यह वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलन में रखती है।
चेहरे की रंगत सुधरना, मुंह के छाले ठीक होना और बालों का झड़ना कम होना ये सब हरड़ के नियमित और सही उपयोग से संभव है। यही कारण है कि आयुर्वेद में इसे रसायन की श्रेणी में रखा गया है, जो शरीर को अंदर से नया बनाती है। हरड़ को अमृत कहे जाने का एक बड़ा कारण इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना भी है। बदलते मौसम में बार-बार सर्दी-जुकाम होना, गले में कफ जमना या जल्दी थक जाना, इन सब में हरड़ शरीर की रक्षा ढाल की तरह काम करती है। यह लिवर को भी मजबूत करती है, जिससे खून साफ रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। हालांकि हरड़ जितनी फायदेमंद है, उतनी ही सावधानी भी जरूरी है। बहुत अधिक मात्रा लेने से दस्त या कमजोरी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और बहुत ज्यादा कमजोर लोगों को इसका सेवन बिना वैद्य की सलाह के नहीं करना चाहिए।
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