आखिर भाजपा के पतन की पटकथा कौन लिख रहा है ?, क्या अपने ही 'विभीषण' दे रहे हैं भाजपा को मात ?
कहां जाता है कि लोकतंत्र में सत्ता का हस्तांतरण जरूरी होता है नहीं तो सत्ताधारी निरंकुश हो जाता है। यहीं सवाल लोग भाजपा पर कर रहे हैं। तर्क में यूजीसी गिना रहे हैं। आखिर भाजपा इतनी बड़ी चूक कैसे करने जा रहीं थीं। कुछ विपक्षी निरंकुश बता रहे हैं तो कुछ अति बता रहे हैं लेकिन एक बात जो है वह यह है कि यूजीसी ने भाजपा का बड़ा नुक़सान किया। यह सौ आने सत्य है। ऐसा लग रहा है कि लगातार सत्ता में बनी हुईं भाजपा किसी मुगालते में जी रही है कि आखिर सवर्ण जायेंगे कहां। थक हार कर हमारे ही रहेंगे और वोट देंगे।अगर भाजपा ऐसा नहीं सोच रही थीं तो फिर यूजीसी में इतनी गंभीर खामियां क्यों कर दीं। पूर्व के सभी आंदोलनों को एक तरफ रख दिया जाय और यूजीसी को लेकर सवर्णों के क्रोध को देखा जाय तो सबसे बड़ा नुक़सान यूजीसी से भाजपा को हुआ है। इसकी भरपाई आखिर भाजपा कैसे करेगी ।
एक तरफ एसआईआर में गंभीर खामियां, फिर यूजीसी में गंभीर चूक। कोई भाजपा के पतन की पटकथा लिख रहा है क्या ? एक पर एक गंभीर चूक होती जा रही है । इसके नजदीकी चुनाव में दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। बच्चा-बच्चा जानता है कि सवर्ण भाजपा का वोट बैंक है और ऐसा मजबूत वोट बैंक जिसे कोई बहला फुसला नहीं सकता । यह भाजपा के दुख , संघर्ष में हमेशा काम आया है लेकिन जहां फायदे की बात आती है, इसे अलग कर दिया जाता है। और तो और, सवर्ण को ही हमेशा हाशिये पर रख दिया जाता है. आखिर क्यों ? यूजीसी में भी यहीं हाल है । क्या जातियां जातियों का शोषण नहीं करती हैं । कहा जाता है कि बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है। उसके लिए इस यूजीसी में कोई कानून क्यों नहीं बना। हर तरफ , हर समय , हर जगह , केवल सवर्ण ही दिखता है शोषण करने वाला । आज सवर्णों की दिन दशा मालूम नहीं है क्या ? आज जितना शोषित सवर्ण है, उतना शोषित कोई नहीं है । सवर्ण को भाजपा पर बहुत विश्वास और आशा थीं ।
इस आशा और विश्वास को भाजपा के किसी विभीषण ने खत्म कर भाजपा के पतन की पटकथा लिख दी है । यह सब देखकर यही लगता है कि भाजपा में कोई ऐसा है जो भाजपा को अंदर खाने चित करने में लगा हुआ है। आप अपने पैर पर अपने ही कुल्हाड़ी मार रहे हैं । आखिर क्या कर रहे हैं इतिहास गवाह है कि जिसने भी सवर्णों के साथ गद्दारी की, आज वह सत्ता से कोसों दूर हैं और आज खुले आम मंच पर सवर्णों को लुभा रहे हैं । आप भी तो इन्हीं रास्तों पर चलने की तैयारी कर रहे हैं क्या। कहीं आप अति विश्वास के शिकार तो नहीं हो रहे हैं । याद रखिए अति हर चीज की खराब होती है।
आप सबका साथ , सबका विकास का नारा दिए थे लेकिन यूजीसी से सवर्णों के विनाश की नींव रख रहे थे । समानता रख कर इसका समाधान किया जा सकता था। सभी को प्रतिनिधित्व दिया जा सकता था। कोई गलत कर रहा था तो सजा का हकदार था। बहुत कुछ ऐसा था जिसे आप सुधार कर समानता ला सकते थे और वाहवाही बटोर सकते थे लेकिन आपने अपने पैर पर अपने ही कुल्हाड़ी मार ली। जिस जातिवाद से लोग निजात पाना चाह रहे हैं, वहीं फिर से आपने जातिवाद का बीज बो कर विद्वेष और वैमनस्यता फैला दी ।
-विनय कुमार मिश्र
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