वक्री ग्रहों का तांडव: जानें मेष से मीन तक, किस राशि के लिए 'होली' लाएगी खुशियां और किसे रहना होगा सावधान
शनि, मंगल, बुध और गुरु की बदली चाल से मचेगी हलचल; सावधानी और विशेष उपायों से दूर होंगे संकट
रंगों का त्यौहार होली इस बार न केवल खुशियों के रंग लेकर आ रहा है, बल्कि अंतरिक्ष में ग्रहों की एक दुर्लभ स्थिति भी बन रही है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस होली पर चार बड़े ग्रह वक्री अवस्था में रहेंगे। वक्री होने का अर्थ है कि पृथ्वी से देखने पर ये ग्रह अपनी सामान्य दिशा के विपरीत (पीछे की ओर) चलते हुए प्रतीत होंगे। जब भी कोई प्रभावशाली ग्रह वक्री होता है, तो उसका प्रभाव अधिक तीव्र और अप्रत्याशित हो जाता है।
वक्री ग्रहों का प्रभाव: क्या पड़ेगा असर?
इस बार चार ग्रहों की उल्टी चाल का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा:
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शनि का प्रभाव: शनि कर्म और न्याय के देवता हैं। इनके वक्री होने से कार्यों में विलंब हो सकता है। विशेष रूप से व्यापार और निर्माण कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। पुराने अटके हुए कानूनी मामले दोबारा उभर सकते हैं।
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मंगल का प्रभाव: मंगल साहस और क्रोध का प्रतीक है। मंगल के वक्री होने से स्वभाव में चिड़चिड़ापन और छोटी-छोटी बातों पर विवाद की स्थिति बन सकती है। दुर्घटनाओं और अग्नि संबंधी घटनाओं के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है।
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बुध का प्रभाव: बुध बुद्धि और संवाद का कारक है। वक्री बुध के कारण गलतफहमियां बढ़ सकती हैं। निवेश के फैसलों में सावधानी बरतें और वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बने-बनाए रिश्ते बिगड़ सकते हैं।
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लेन-देन: बुध वक्री होने के कारण 21 मार्च तक बड़े वित्तीय दस्तावेजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें।
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वाहन: मंगल वक्री होने से तेज रफ्तार और नशीले पदार्थों का सेवन कर वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है।
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विवाद: होली के मिलन समारोह में पुराने विवादों को हवा न दें, वाणी की कटुता संबंधों को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।
बृहस्पति (गुरु) का प्रभाव: गुरु ज्ञान और आर्थिक लाभ के स्वामी हैं। इनके वक्री होने से शिक्षा और धन लाभ में देरी हो सकती है। धार्मिक कार्यों में मन कम लगेगा और खर्चों में अचानक वृद्धि हो सकती है।
वक्री शनि, मंगल, बुध और गुरु का संयुक्त प्रभाव कुछ राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलेगा, तो कुछ के लिए चुनौतियाँ खड़ी कर सकता है।
राशिफल और उपाय:
राशि संभावित प्रभाव विशेष उपाय मेष कार्यक्षेत्र में दबाव बढ़ेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें। हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाएं। वृषभ आर्थिक लाभ के योग हैं, लेकिन स्वास्थ्य का ध्यान रखें। छोटी कन्याओं को मिश्री बांटें। मिथुन संवाद में भ्रम हो सकता है, निवेश से बचें। गणेश जी को दूर्वा (घास) अर्पित करें। कर्क पारिवारिक कलह की संभावना, मन अशांत रहेगा। शिव चालीसा का पाठ करें। सिंह मान-सम्मान में वृद्धि होगी, पुराने मित्र मिलेंगे। सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें। कन्या खर्चों में बढ़ोतरी होगी, यात्रा में सावधानी बरतें। गाय को हरा चारा खिलाएं। तुला करियर में नए अवसर मिलेंगे, वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। लक्ष्मी जी को सफेद फूल चढ़ाएं। वृश्चिक गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें, चोट लगने का भय है। सुंदरकांड का पाठ करें। धनु भाग्य का साथ मिलेगा, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। माथे पर केसर का तिलक लगाएं। मकर शनि की वक्री चाल से मेहनत बढ़ेगी, धैर्य रखें। पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। कुंभ मानसिक तनाव हो सकता है, व्यापार में बड़े बदलाव न करें। शनि स्तोत्र का पाठ करें। मीन रुका हुआ धन वापस मिलेगा, शिक्षा में सफलता मिलेगी। विष्णु सहस्रनाम का श्रवण करें।
विशेष सावधानियां:
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लेन-देन: बुध वक्री होने के कारण 21 मार्च तक बड़े वित्तीय दस्तावेजों पर बिना पढ़े हस्ताक्षर न करें।
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वाहन: मंगल वक्री होने से तेज रफ्तार और नशीले पदार्थों का सेवन कर वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है।
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विवाद: होली के मिलन समारोह में पुराने विवादों को हवा न दें, वाणी की कटुता संबंधों को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है।
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बचाव के अचूक उपाय
वक्री ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए ज्योतिष शास्त्र में कुछ सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं, जिन्हें होली के दौरान करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं:
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हनुमान चालीसा का पाठ: मंगल और शनि की शांति के लिए नियमित रूप से हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। होली की अग्नि में काली तिल और जौ अर्पित करें।
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दान-पुण्य: जरूरतमंदों को अनाज, काले वस्त्र या तिल के लड्डुओं का दान करें। इससे शनि देव की कृपा बनी रहती है।
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वाणी पर संयम: बुध के प्रभाव को शुभ करने के लिए हरे रंग के गुलाल का प्रयोग करें और पक्षियों को दाना डालें। किसी से भी अपशब्द न बोलें।
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गुरु मंत्र का जाप: बृहस्पति को अनुकूल करने के लिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें और भगवान विष्णु की आराधना करें। माथे पर केसर या हल्दी का तिलक लगाएं।
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होली की भस्म: होलिका दहन के अगले दिन उसकी भस्म को माथे पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और ग्रहों के दोषों का शमन होता है।
- निष्कर्ष: ग्रहों की स्थिति चाहे जैसी भी हो, सकारात्मक सोच और सात्विक जीवन शैली से इनके दुष्प्रभावों को कम किया जा सकता है। होली के दिन होलिका दहन की अग्नि की सात परिक्रमा कर 'नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना सभी राशियों के लिए कल्याणकारी है।
विशेष नोट: ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति की निजी कुंडली और महादशा पर भी निर्भर करता है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार सटीक जानकारी चाहते हैं, तो किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
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लेखक के बारे में
मुज़फ्फरनगर के प्रमुख ज्योतिषविद संजय सक्सेना पिछले 25 वर्षों से 'शिवालिक राशिरत्न केंद्र' के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु और रत्न विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। संजय जी को ज्योतिष की गहन और प्रामाणिक शिक्षा वेदपाठी भवन के विख्यात विद्वान प्रियशील चतुर्वेदी (रतन गुरु) जी के सानिध्य में प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि उनके गुरु रतन गुरु जी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय सीता राम चतुर्वेदी जी के सुपुत्र हैं, जिससे संजय सक्सेना जी को एक अत्यंत समृद्ध और विद्वान गुरु-परंपरा का लाभ मिला है।
संजय सक्सेना जी की सबसे बड़ी विशेषज्ञता 'प्रश्न लग्न' में है। ज्योतिष की यह एक ऐसी विधा है जिसमें बिना जन्म कुंडली के भी जातक की तात्कालिक समस्याओं का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। अपनी इस विशेषज्ञता और ढाई दशकों के अनुभव के आधार पर वे न केवल सटीक भविष्यवाणी करते हैं, बल्कि वास्तु और रत्नों के माध्यम से प्रभावी समाधान भी प्रदान करते हैं। उनकी पारखी नज़र और शास्त्रीय ज्ञान ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विश्वसनीय ज्योतिषियों में शामिल किया है। ज्योतिषीय परामर्श, वास्तु ज्ञान या शुद्ध रत्नों की जानकारी हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9837400222 पर संपर्क किया जा सकता है।

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