मन के भीतर झांके बिना अधूरी है भक्ति, लकीर पीटने से नहीं होगी प्रभु की प्राप्ति
धर्म का वास्तविक अर्थ आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कहीं खो गया है। हमने यह मान लिया है कि मंदिर जाना और भगवान को प्रणाम करना ही भक्ति की पूर्णता है। हम केवल पूर्वजों द्वारा चली आ रही परंपराओं का निर्वाह कर रहे हैं, लेकिन कभी यह विचार नहीं किया कि मंदिर जाने का वास्तविक संदेश क्या है। मंदिर मनुष्य को इशारा करता है कि 'हे मानव, अपने मन के अंदर झांको और भीतर प्रवेश करो।'
साधन और साध्य का अंतर समझना जरूरी
अक्सर हम साधन को ही साध्य समझ लेते हैं। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है—यदि आप यात्रा पर हैं और मार्ग में एक दूरी सूचक पत्थर पर लिखा है 'हरिद्वार शून्य किलोमीटर', तो वह पत्थर स्वयं हरिद्वार नहीं है। वह केवल एक संकेत है कि आप द्वार पर पहुँच गए हैं। हरिद्वार के भीतर प्रवेश तो आपको स्वयं ही करना होगा। ठीक इसी प्रकार, मंदिर वह संकेत है जो बताता है कि परमात्मा को अपने अंतस में ढूंढो, लेकिन हमने मंदिर की चौखट को ही लक्ष्य मान लिया है।
धर्म ग्रंथ हैं मार्गदर्शक, चलना आपको ही होगा
ये भी पढ़ें 'तुम सिर्फ मेरी पत्नी नहीं, मेरी शांति हो', चिरंजीवी ने पत्नी सुरेखा के जन्मदिन पर लिखा भावुक नोटहमारे धर्म ग्रंथ भी केवल मार्ग बताते हैं, उस मार्ग पर चलने का दायित्व स्वयं मनुष्य का है। यदि हम केवल बाहरी परंपराओं में उलझे रहे और मन के भीतर प्रवेश करने का प्रयास नहीं किया, तो यह केवल लकीर पीटने जैसा होगा। तत्व को समझे बिना की गई भक्ति से कुछ हाथ आने वाला नहीं है। प्रभु की प्राप्ति तभी संभव है जब मनुष्य अपने अंतर्मन की गहराइयों में उतरे और स्वयं से साक्षात्कार करे।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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