अहंकार से सावधान: मानव जीवन में विवेक, विनम्रता और आत्मचिंतन का महत्व
सुन्दरता, यौवन, कुल, धन-दौलत, विद्या और पदवी का अहंकार मनुष्य को भीतर ही भीतर जकड़ लेता है। अहंकार के वशीभूत होकर व्यक्ति दूसरों को तुच्छ समझने लगता है। उसे हर किसी में दोष दिखाई देते हैं, जबकि अपने दोष भी गुण प्रतीत होते हैं। यही अहंकार मनुष्य की दृष्टि को विकृत कर देता है और वह सत्य को स्वीकार करने की क्षमता खो बैठता है।
संत-महात्माओं ने सदा अपनी वाणी में अहंकार रूपी विकार से बचने का उपदेश दिया है। वे बताते हैं कि जो कुछ भी हमें प्राप्त है, वह परमात्मा की कृपा से ही है। किंतु मनुष्य का अज्ञान ऐसा है कि वह ईश्वर के प्रति कृतज्ञ होने के बजाय स्वयं को ही श्रेष्ठ मानने लगता है। यही भाव उसे पतन की ओर ले जाता है।
सृष्टि में प्रभु द्वारा रचित प्रत्येक वस्तु का अपना महत्व और उद्देश्य है। कोई भी रचना निरर्थक नहीं है। यह हमारी बुद्धि और विवेक पर निर्भर करता है कि हम उनका सदुपयोग करें या दुरुपयोग। उदाहरण के लिए, दूध देने वाले पशुओं का दूध हमें शक्ति और स्वास्थ्य प्रदान कर सकता है, परंतु यदि हम विवेकहीन होकर हिंसा का मार्ग अपनाएं, तो वही प्रवृत्ति हमारे भीतर विकारों को जन्म दे सकती है।
काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे भाव मनुष्य के स्वभाव का हिस्सा हैं। ये ऊर्जा के रूप में आवश्यक भी हैं, क्योंकि इनके माध्यम से ही मनुष्य जीवन में प्रेरणा और संरक्षण पाता है। किंतु संकट तब उत्पन्न होता है जब मनुष्य इनका स्वामी बनने के बजाय इनका दास बन जाता है। जब ये विकार हमारे नियंत्रण में रहते हैं, तब वे साधन हैं; पर जब हम इनके नियंत्रण में आ जाते हैं, तब वे बंधन बन जाते हैं।
अतः आवश्यक है कि मनुष्य आत्मचिंतन करे, विनम्रता अपनाए और अपने भीतर के अहंकार को पहचानकर उसे नियंत्रित करे। सच्ची महानता विनम्रता में ही निहित है, क्योंकि विनम्र व्यक्ति ही दूसरों के गुणों को स्वीकार कर सकता है और अपने दोषों को सुधारने का साहस रखता है।
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लेखक के बारे में
"गन्ना विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रण पाल सिंह राणा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। प्रशासनिक सेवाओं में एक लंबा और सफल कार्यकाल बिताने के साथ-साथ, पिछले 50 वर्षों से ज्योतिष, वेद और अध्यात्म के प्रति उनकी गहरी रुचि ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दी है।
श्री राणा पिछले 30 वर्षों से 'रॉयल बुलेटिन' के माध्यम से प्रतिदिन 'अनमोल वचन' स्तंभ लिख रहे हैं, जो पाठकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। उनके लिखे विचार न केवल ज्ञानवर्धक होते हैं, बल्कि पाठकों को जीवन की चुनौतियों के बीच सकारात्मक दिशा और मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। प्राचीन वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ने की उनकी कला को पाठकों द्वारा वर्षों से सराहा और पसंद किया जा रहा है।"

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