दिल्ली में फर्जी NIA अफसर गिरफ्तार, आई-कार्ड दिखाकर युवाओं को देता था सरकारी नौकरी का झांसा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में फर्जी पहचान पत्र के जरिए नौकरी दिलाने का झांसा देने वाले एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, कोतवाली थाना पुलिस की गश्ती टीम ने बुधवार को लाल किला क्षेत्र के पीछे दिल्ली चलो पार्क के पास एक संदिग्ध वाहन से आरोपी को हिरासत में लिया। वाहन में उसके साथ एक नाबालिग भी मौजूद था, जिसे बाद में परिजनों के संपर्क में लाया गया। पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान आरोपी के पास से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) का एक कथित पहचान पत्र बरामद हुआ। प्रारंभिक जांच में यह आई-कार्ड फर्जी पाया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि एनआईए इस प्रकार का कोई पहचान पत्र जारी नहीं
करती। जांच में सामने आया कि आरोपी इसी फर्जी पहचान के जरिए लोगों पर रौब जमाकर उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था। प्राथमिक पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के एक नाबालिग को दिल्ली में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। परिवार की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उसने उनसे अग्रिम राशि भी वसूल ली। दोनों 12 फरवरी को कश्मीर से दिल्ली पहुंचे थे और जामा मस्जिद इलाके के एक गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी ने दिल्ली में अपने कुछ कथित संपर्कों के माध्यम से नौकरी की संभावनाएं तलाशने का दिखावा किया, लेकिन कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर सका।
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इसी बीच उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगने पर पुलिस ने निगरानी शुरू की। पूछताछ के दौरान उसके बयान और दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आया, जिसके बाद फर्जी आई-कार्ड का मामला उजागर हुआ। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। संयुक्त पूछताछ विशेष प्रकोष्ठ, खुफिया एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों के साथ जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने अब तक कितने लोगों को इस तरह ठगा है। मामले में आगे की जांच जारी है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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