‘एक साल दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल’ होर्डिंग विवाद पर गरमाई सियासत
नई दिल्ली। दिल्ली की सियासत में एक बार फिर पोस्टर और होर्डिंग को लेकर विवाद गहरा गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने राजधानी में लगाए गए करीब 150 वैध होर्डिंग फाड़ दिए। इन होर्डिंग पर लिखा था, “एक साल, दिल्ली बेहाल, याद आ रहे केजरीवाल।” सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ये होर्डिंग दिल्ली में सरकार के एक साल पूरे होने के मौके पर लगाए गए थे और इसके लिए संबंधित वेंडर्स को विधिवत भुगतान किया गया था। उन्होंने दावा किया कि होर्डिंग पूरी तरह वैध थे और नगर निगम तथा एनडीएमसी के निर्धारित स्थलों पर लगाए गए थे। बावजूद इसके, उन्हें हटाया गया।
ये भी पढ़ें महिला हेड कांस्टेबल के बंद घर को चोरों ने खंगाला, शादी की खुशियों के बीच लाखों के गहने और DVR साफभारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली की वर्तमान सरकार अरविंद केजरीवाल के नाम से घबराई हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार वेंडर्स को धमकी दे रही है कि यदि वे इन होर्डिंग को नहीं हटाएंगे, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा और भविष्य में सरकारी काम नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि “आप” ने होर्डिंग से सिर्फ एक राजनीतिक संदेश दिया था। भारद्वाज के मुताबिक, “सच कड़वा होता है और सरकार ने होर्डिंग फाड़कर अपनी तिलमिलाहट जाहिर कर दी है।” आप नेता ने आरोप लगाया कि कनॉट प्लेस, साउथ दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ दिल्ली और एनडीएमसी क्षेत्र में लगे होर्डिंग को व्यवस्थित तरीके से हटाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए गए हैं, जिनमें पहले होर्डिंग लगे दिखाई देते हैं और बाद में हटाए गए। भारद्वाज ने एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश जारी किए गए, जिसके बाद कार्रवाई की गई। उन्होंने भाजपा पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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