चीनी रोबोट को अपना 'आविष्कार' बताकर फंसी गलगोटिया यूनिवर्सिटी, सरकार ने AI एक्सपो में स्टॉल खाली कराया
350 करोड़ के निवेश का दावा करने वाली यूनिवर्सिटी के पवेलियन की बिजली कटी; कांग्रेस ने साधा निशाना, राहुल गांधी बोले- 'बिखरा हुआ पीआर तमाशा'
ग्रेटर नोएडा/दिल्ली। इंडिया AI इम्पैक्ट समिट एक्सपो में उस समय एक बड़ी असहज स्थिति पैदा हो गई जब देश के एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान पर विदेशी तकनीक को अपनी खोज बताकर पेश करने का गंभीर आरोप लगा। विवाद इतना बढ़ा कि केंद्र सरकार को कड़ा रुख अपनाते हुए समिट में लगे यूनिवर्सिटी के स्टॉल को खाली करने के निर्देश देने पड़े। इतना ही नहीं, अनुशासनात्मक कार्रवाई के तौर पर पवेलियन की बिजली भी काट दी गई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें विदेशी कंपनी के रोबोटिक डॉग को स्वदेशी तकनीक के रूप में प्रदर्शित किया गया था।
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर का वीडियो सामने आया। वीडियो में दावा किया गया कि 'ओरियन' नाम का यह रोबोटिक डॉग यूनिवर्सिटी के 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' ने खुद तैयार किया है और संस्थान AI के क्षेत्र में 350 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश कर रहा है। हालांकि, जैसे ही यह वीडियो टेक एक्सपर्ट्स की नजर में आया, उन्होंने इसे चीनी कंपनी 'यूनिट्री' का 'Go2' मॉडल बताया, जो बाजार में आसानी से उपलब्ध है। विवाद बढ़ने पर यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसे अपना बनाने का दावा नहीं किया, बल्कि यह छात्रों के सीखने के लिए एक 'चलता-फिरता क्लासरूम' है। हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) ने 'कम्युनिटी नोट' के जरिए यूनिवर्सिटी के इस स्पष्टीकरण को भ्रामक करार दिया।
इस घटनाक्रम ने अब राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े से वैश्विक स्तर पर भारत की छवि धूमिल हुई है और चीनी मीडिया को हमारा मजाक उड़ाने का मौका मिला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि भारत के टैलेंट और डेटा का सही इस्तेमाल करने के बजाय, यह पूरी समिट केवल एक 'पीआर तमाशा' बनकर रह गई है, जहाँ विदेशी प्रोडक्ट्स का दिखावा किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें दिल्ली में फिर लौटी 'खराब' हवा: एक्यूआई 221 पहुंचा, हल्की ठंड के बीच प्रदूषण ने बढ़ाई चिंतादूसरी ओर, यूनिवर्सिटी प्रशासन अब बैकफुट पर नजर आ रहा है। प्रोफेसर नेहा सिंह ने इस पूरे विवाद की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि शायद जोश और उत्साह में बातें स्पष्ट तौर पर नहीं रखी जा सकीं। एक्सपो एरिया खाली कराए जाने के सवाल पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार ने आधिकारिक तौर पर संस्थान को वहां से हटने का आदेश दिया था। शिक्षा जगत में इस घटना को 'कॉपी-पेस्ट कल्चर' के उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे भारत के वास्तविक नवाचार (इनोवेशन) की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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