अजमेर शरीफ दरगाह विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर दरगाह में शिव मंदिर के दावे से जुड़ी सुनवाई रोकने वाली याचिका खारिज की
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे से जुड़े मामले में सुनवाई पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह याचिका दरगाह को मानने वाले दरवेश समुदाय के लोगों ने दायर की थी। कोर्ट ने याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अजमेर की निचली अदालत में चल रहे मुख्य मामले के पक्षकार नहीं हैं। उन्होंने अपनी याचिका में उन मूल पक्षकारों को भी शामिल नहीं किया था, जिन्होंने यह दावा किया है कि दरगाह किसी प्राचीन शिव मंदिर के अवशेषों पर बनी है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आधार पर याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता। याचिका में दावा किया गया था कि प्लेसेस ऑफ वर्शिप (एक्ट) 1991 की वैधता से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 12 दिसंबर 2024 को अंतरिम आदेश दिया था।
ये भी पढ़ें बिहार : 'मुख्यमंत्री रोजगार योजना' में सीएम नीतीश ने 25 लाख महिलाओं के खाते में भेजे 10 हजार रुपयेइस आदेश में कहा गया था कि धार्मिक स्थलों से जुड़े किसी नए मुकदमे को देश भर की कोई निचली अदालत स्वीकार न करे और ऐसे मामलों में कोई प्रभावी आदेश न पास करे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि इस आदेश की अवहेलना करते हुए अजमेर की अदालत ने इस विवाद पर सुनवाई शुरू की है और नोटिस जारी किए हैं, इसलिए अजमेर कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता निचली अदालत के मूल केस में शामिल नहीं हैं, इसलिए वे सीधे सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की मांग नहीं कर सकते। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का मुख्य केस पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह मामला काफी संवेदनशील है क्योंकि अजमेर शरीफ दरगाह सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है, जो लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। अजमेर की निचली अदालत में यह मामला अभी भी लंबित है और आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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