लोकसभा अध्यक्ष का दो टूक संदेश: संसद में नियम ही सर्वोपरि, प्रधानमंत्री भी नहीं हैं ऊपर
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर लंबी चर्चा के बाद आसन पर लौटे ओम बिरला
नई दिल्ली। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर हुई लंबी बहस के बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को आसन पर लौटे। उन्होंने सदन में एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना अत्यंत आवश्यक है और नेता प्रतिपक्ष को कभी नहीं रोका गया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि सदन का संचालन पूरी तरह से नियमों से बंधा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने नियम 372 का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री को भी सदन में बात रखने के लिए अध्यक्ष की अनुमति लेना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य मर्यादा के विरुद्ध आचरण करता है, तो आसन को कठोर निर्णय लेने पड़ते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने हमेशा महिलाओं और कम बोलने वाले सांसदों को अधिक अवसर देने का प्रयास किया है, ताकि 140 करोड़ देशवासियों की आवाज को संसद में पूरी मजबूती से उठाया जा सके। ओम बिरला ने कहा कि महिला सदस्यों को लेकर भी आरोप लगाया गया कि उन्हें मौका कम दिया जाता है। लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे कार्यकाल में सभी महिला सदस्यों ने अपने विचार रखे हैं।
माइक बंद करने के आरोपों का खंडन
उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान कुछ लोगों ने माइक बंद करने का आरोप लगाया। लेकिन चेयर के पास माइक बंद करने का बटन नहीं होता। विपक्ष में कई लोग इस चेयर पर बैठते हैं। उन्होंने विपक्ष के उन सदस्यों को भी याद दिलाया जो स्वयं पूर्व में चेयर पर बैठ चुके हैं और प्रक्रिया को भली-भांति समझते हैं।
लोकतंत्र में विपक्ष की अहम भूमिका
सदन को 'विचारों का जीवंत मंच' बताते हुए अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सदन के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह हर उस सदस्य का आभारी हैं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।
अनुशासन बनाम निलंबन
निलंबन के मुद्दे पर बोलते हुए बिरला ने कहा कि यह उनके लिए कभी भी सुखद निर्णय नहीं होता। उन्होंने कहा, "मेरा दल से ऊपर उठकर सभी सदस्यों के साथ व्यक्तिगत संबंध हैं। लेकिन सदन की गरिमा और व्यवस्था बनाए रखना मेरी जिम्मेदारी है। जब सदस्य मर्यादा का पालन नहीं करते, तो मजबूरन सदन स्थगित करना पड़ता है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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