मथुरा: आशुतोष महाराज पर गाड़ी के पेमेंट हड़पने का आरोप, कारोबारी ने ट्रस्ट को बताया 'फर्जी'
मथुरा। धर्म और अध्यात्म की आड़ में धोखाधड़ी का एक नया मामला सामने आया है। मथुरा के एक स्थानीय ऑटोमोबाइल कारोबारी ने आशुतोष महाराज और उनके संस्थान पर स्कॉर्पियो गाड़ी का भुगतान न करने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। कारोबारी ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए ट्रस्ट की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मथुरा के कारोबारी का आरोप है कि आशुतोष महाराज के कहने पर उनके ट्रस्ट के लिए एक नई स्कॉर्पियो गाड़ी बुक की गई थी। डिलीवरी के समय कुछ भुगतान किया गया, लेकिन बड़ी राशि (लाखों में) बकाया रह गई। कारोबारी का कहना है कि जब उन्होंने अपने बकाया पैसों के लिए महाराज और उनके करीबियों से संपर्क किया, तो उन्हें टालमटोल किया जाने लगा। बार-बार चक्कर काटने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ।
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पीड़ित कारोबारी का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब उन्होंने दबाव बनाया, तो आशुतोष महाराज के प्रभाव का इस्तेमाल कर उन पर ही झूठी FIR दर्ज करवा दी गई। कारोबारी का दावा है कि उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
"ट्रस्ट फर्जी है" – कारोबारी का बड़ा दावा
कारोबारी ने जांच की मांग करते हुए महाराज के संस्थान पर कई सवालिया निशान लगाए हैं । कारोबारी का कहना है कि जिस ट्रस्ट के नाम पर गतिविधियां चलाई जा रही हैं, वह कागजों पर फर्जी है या उसके नियमों का उल्लंघन हो रहा है। आरोप है कि भक्तों से लिए गए दान और चंदे का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों के बजाय निजी ऐशो-आराम और संपत्ति खड़ा करने में किया जा रहा है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि महाराज अपने रसूख के दम पर स्थानीय पुलिस और प्रशासन को प्रभावित कर रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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