सुप्रीम कोर्ट: शब्बीर अहमद शाह को 6 साल बाद मिली जमानत, मीरवाइज उमर फारूक ने बताया 'देर से मिला न्याय'
श्रीनगर। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेता मीरवाइज उमर फारूक ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि अदालत से उम्मीद है कि वह जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के राजनेताओं और युवाओं को भी राहत देगी। मीरवाइज उमर फारूक ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "सुप्रीम कोर्ट से लंबे समय तक जेल में रहने के बाद शब्बीर शाह को मिली जमानत का स्वागत है। हमें पूरी उम्मीद है कि कोर्ट भी इसी भावना से जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर की जेलों में बंद सभी राजनीतिक कैदियों और युवाओं को राहत देगी, जिससे उनके परिवारों और जम्मू-कश्मीर के लोगों को खुशी मिलेगी।" सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शब्बीर शाह की बेटी सेहर शब्बीर शाह ने पोस्ट किया, "बिना किसी सजा के जेल में रहने के बाद आज न्याय ने अपना पहला कदम बढ़ाया है।
ये भी पढ़ें कौशल विकास से आत्मनिर्भर बनेंगी महिलाएं; राज्यसभा सांसद गीता शाक्य ने प्रतिभाओं को किया सम्मानितहमें हमेशा न्यायपालिका पर भरोसा था और आज वह भरोसा पुख्ता हो गया है।" सुप्रीम कोर्ट ने टेरर फंडिंग केस में जेल में बंद शब्बीर अहमद शाह को गुरुवार को जमानत दे दी। जमानत पर कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे वे जेल से बाहर रहते हुए किसी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे और ट्रायल में सहयोग करेंगे। शब्बीर शाह को 2019 से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया था। शाह पर आरोप लगाया कि वे जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश में शामिल थे और टेरर फंडिंग में उनका हाथ था।
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एनआईए ने मामले में कई चार्जशीट दाखिल की थीं, जिसमें शाह को बाद में शामिल किया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। अपनी याचिका में शब्बीर शाह की ओर से कहा गया कि उनकी उम्र अब 74 साल हो चुकी है, वे इस मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद हैं और ट्रायल में कुल 400 गवाह हैं, जिनमें से अभी सिर्फ 15 की ही गवाही पूरी हुई है। इस मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी।
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मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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