प्रयागराज में घूसखोर इंस्पेक्टर रंगे हाथों गिरफ्तार, थाने में रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने दबोचा
प्रयागराज में भ्रष्टाचार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन टीम ने बारा थाने के प्रभारी निरीक्षक (इंस्पेक्टर) को पचहत्तर हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इंस्पेक्टर ने एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के एवज में यह रकम मांगी थी।
रंगे हाथों गिरफ्तारी और हाई वोल्टेज ड्रामा
एंटी करप्शन टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर को मंगलवार दोपहर थाने में ही उस वक्त दबोच लिया, जब वह पीड़ित पक्ष से पैसे ले रहा था। पकड़े जाने पर इंस्पेक्टर ने पहले अपने पद का रौब दिखाया, लेकिन जब टीम उसे खींचकर ले जाने लगी, तो वह गिड़गिड़ाने लगा। उसने यह कहते हुए रहम की गुहार लगाई कि "छोड़ दो, बर्बाद हो जाऊंगा, स्टाफ का मामला है"। गिरफ्तारी के बाद उसे लिखा-पढ़ी के लिए घूरपुर थाने ले जाया गया।
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यह पूरा मामला नवंबर माह में दर्ज हुए एक मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें भदोही निवासी संतोष कुमार दुबे पर सुलह के लिए दबाव बनाने का आरोप था। संतोष का आरोप है कि इंस्पेक्टर ने जांच के दौरान जानबूझकर उनका नाम मुकदमे में जोड़ दिया था और नाम हटाने के बदले पहले भी पैसे ले चुका था। हाल ही में जब पीड़ित महिला ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि उसने गलतफहमी में मुकदमा लिखाया था, तो यह तय हो गया था कि मामले में फाइनल रिपोर्ट लगेगी। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए इंस्पेक्टर ने पचहत्तर हजार रुपये की अतिरिक्त मांग की थी।
पुराना रहा है विवादों से नाता
गिरफ्तार इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर मूल रूप से वाराणसी के सारनाथ का निवासी है और वर्ष 2012 में दरोगा से प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बना था। प्रयागराज में तैनाती के दौरान उसका विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले वह खुल्दाबाद और शाहगंज थाने का भी प्रभारी रह चुका है, जहां से शिकायतों के आधार पर उसे हटाकर पुलिस लाइन भेजा गया था। करीब छह महीने पहले ही उसे बारा थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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