शिवधाम ऋषि आश्रम में राम विवाह और धनुष भंग की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में अजीतमल तहसील क्षेत्र के शेखुपुर-जैनपुर स्थित शिवधाम ऋषि आश्रम में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन बुधवार को कथा वाचक पंडित राज नारायण (राजा पंडित) ने भगवान श्रीराम के धनुष भंग और राम विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और पूरे परिसर में भक्ति का माहौल बना रहा।
ये भी पढ़ें दिल्ली में फिर लौटी 'खराब' हवा: एक्यूआई 221 पहुंचा, हल्की ठंड के बीच प्रदूषण ने बढ़ाई चिंताकथा के दौरान पंडित राज नारायण ने बताया कि किस प्रकार मिथिला नरेश जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर के लिए भगवान शिव के दिव्य धनुष को प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी थी। अनेक राजा-महाराजा धनुष को उठाने तक में असफल रहे, तब गुरु विश्वामित्र के आदेश पर श्रीराम ने सहज भाव से धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाई और वह भंग हो गया। धनुष टूटते ही पूरी सभा “जय श्रीराम” के उद्घोष से गूंज उठी। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
इसके बाद कथा वाचक ने राम-सीता विवाह का मनोहारी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि मर्यादा और आदर्शों का मिलन था। विवाह प्रसंग के दौरान मंगल गीतों का गायन हुआ और श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर आनंद व्यक्त किया। पंडित जी ने बताया कि भगवान राम का जीवन त्याग, मर्यादा और धर्म पालन का संदेश देता है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया।
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा प्रतिदिन निर्धारित समय पर जारी रहेगी और समापन दिवस पर भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। कथा स्थल पर व्यवस्था सुचारु रखने के लिए स्वयंसेवक भी सक्रिय रहे। पूरे क्षेत्र में राम कथा को लेकर उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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