राममंदिर दर्शनार्थियों को दिखाए जाएंगे श्रीराम जन्मभूमि मुकदमे के साक्ष्य: नृपेंद्र मिश्र
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि मंदिर परिसर में बन रहे संग्रहालय में दर्शनार्थियों को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े ऐतिहासिक मुकदमों के साक्ष्य और 500 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई की पूरी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में विकसित किए जा रहे संग्रहालय में 20 आधुनिक गैलरियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एक गैलरी में विभिन्न न्यायालयों में चले श्रीराम जन्मभूमि मुकदमों के दस्तावेज, साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया को प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु पूरे ऐतिहासिक और कानूनी पक्ष से परिचित हो सकें। इसके लिए संबंधित न्यायालयों से साक्ष्य प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि अब श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिर सहित परिसर में स्थित 14 मंदिरों के दर्शन 3डी तकनीक के माध्यम से भी कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त एक गैलरी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की गई खुदाई से जुड़े प्रमाणों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे मंदिर स्थल के ऐतिहासिक पक्ष को समझा जा सकेगा। उन्होंने बताया कि एक अन्य गैलरी में 7डी तकनीक से सुसज्जित पुष्पक विमान और भगवान श्रीराम के चरणों से जुड़े प्रमुख स्थलों की प्रस्तुति भी की जाएगी। राम मंदिर परिसर में संग्रहालय और शेष बचे कार्यों को अगले 6 से 9 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। राम मंदिर निर्माण में लगी प्रमुख कंपनियां लार्सन एंड टूब्रो और टाटा कंसलटेंसी सर्विस जून माह के बाद अपना कार्य पूर्ण कर मंदिर परिसर से विदा होंगी। उन्होंने कहा कि निर्माण पूर्ण होने के बाद राम मंदिर परिसर श्रद्धालुओं के लिए आस्था, इतिहास और तकनीक का अद्वितीय संगम बनेगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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