गोरखपुर मेडिकल त्रासदी: मोतियाबिंद ऑपरेशन बना अभिशाप..18 मरीजों का जीवन बर्बाद, 9 की आंखें निकालनी पड़ीं
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक निजी अस्पताल द्वारा आयोजित मोतियाबिंद शिविर (Cataract Camp) मासूम मरीजों के लिए अंधेरा लेकर आया। यहाँ ऑपरेशन कराने आए 30 मरीजों में से 24 की हालत गंभीर हो गई, जिनमें से 9 मरीजों की आंखें हमेशा के लिए निकालनी पड़ीं और 9 अन्य की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई है।
कैसे शुरू हुई घटना?
गोरखपुर के एक चिन्हित अस्पताल में दो दिन पहले मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए शिविर लगाया गया था। जिले के ग्रामीण इलाकों से आए लगभग 30 बुजुर्ग मरीजों ने अपना ऑपरेशन कराया। ऑपरेशन के बाद उन्हें घर भेज दिया गया, लेकिन 24 घंटे के भीतर ही तबाही का मंजर शुरू हो गया।
24 घंटे बाद बिगड़ी हालत
मरीजों के अनुसार, घर पहुँचने के कुछ ही घंटों बाद उनकी आंखों में:
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असहनीय चुभन और दर्द शुरू हुआ।
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आंखों में अत्यधिक सूजन और पानी आने लगा।
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जब पट्टियां हटाई गईं, तो कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था (Blackout)।
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'आंखें निकालने' की नौबत क्यों आई?
जब घबराए हुए परिजन मरीजों को वापस अस्पताल लेकर पहुँचे, तो डॉक्टरों ने पाया कि आंखों के अंदर 'एंडोफ्थाल्मिटिस' (Endophthalmitis) नामक भीषण संक्रमण फैल चुका था।
मेडिकल फैक्ट: यह संक्रमण इतनी तेजी से फैलता है कि यदि संक्रमित आंख को तुरंत न निकाला जाए, तो इंफेक्शन ऑप्टिक नर्व के जरिए दिमाग तक पहुँच सकता है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इसी खतरे को देखते हुए 9 मरीजों की आंखें निकालने का दर्दनाक फैसला लेना पड़ा।
लापरवाही के तीन मुख्य कारण
प्रारंभिक जांच में तीन बड़े सुराग मिले हैं जो अस्पताल की ओर इशारा करते हैं।
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दूषित उपकरण: ऑपरेशन में इस्तेमाल किए गए औजार (Surgical Tools) ठीक से स्टरलाइज़ (कीटाणुरहित) नहीं थे।
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OT में इंफेक्शन: जिस ऑपरेशन थिएटर (OT) में सर्जरी हुई, वहां की हवा या सतह पर खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद थे।
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मानकों की अनदेखी: एक ही दिन में बिना पर्याप्त सुरक्षा के इतने बड़े पैमाने पर सर्जरी करना नियमों का उल्लंघन है।
प्रशासन की कार्रवाई
घटना के तूल पकड़ते ही सीएमओ (Chief Medical Officer) ने जांच टीम गठित कर दी है।
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अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया गया है।
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संबंधित डॉक्टरों और प्रबंधन के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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स्वास्थ्य मंत्री ने मामले का संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
घटना के बाद पीड़ितों के परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के तीन बड़े डॉक्टरों की टीम इस मामले की टेक्निकल ऑडिट कर रही है। दोषी सर्जन और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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