शामली में भाजपा नेता ने JE को फोन पर हड़काया, बोले- 'पावर हाउस में आग लगा दूंगा', बीजेपी के दिग्गज नेता के बेटे है !
शामली | उत्तर प्रदेश के शामली जिले के डुंडूखेड़ा गांव में बिजली कटौती और बकाया वसूली को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े सियासी और कानूनी मोड़ पर आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान पर आरोप लगा है कि उन्होंने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर (जेई) सत्य प्रकाश को फोन पर न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की गंभीर धमकी भी दी।
विवाद की जड़: बिजली चोरी और बकाया वसूली
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: तीन लाख रुपये वेतन मांगने पर युवक को किया गायब, अनहोनी की आशंका से सहमा परिवारमामले की शुरुआत पांच दिन पहले हुई थी, जब जेई सत्यप्रकाश अपनी टीम के साथ डुंडूखेड़ा गांव में बिजली चोरी रोकने और बकाया बिलों की वसूली के लिए पहुंचे थे। विभागीय कार्रवाई के दौरान टीम ने कई घरों के केबल उतार दिए और कनेक्शन काट दिए। इस दौरान ग्रामीणों और बिजली कर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली कर्मियों ने उनके साथ गाली-गलौज की, जिसके बाद ग्रामीणों ने टीम को गांव से भगा दिया।
वीडियो वायरल: "मुझसे पेंच लड़ाओगे?"
मंगलवार को जब ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री और वर्तमान में एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे और भाजपा नेता मनीष चौहान से की, तो वे गांव पहुंचे। ग्रामीणों के बीच खड़े होकर मनीष चौहान ने जेई को फोन लगाया और स्पीकर ऑन कर दिया। वायरल वीडियो में नेता जी को यह कहते सुना जा सकता है, "तुम मुझसे पेंच लड़ाओगे, मुझसे बहस करोगे? तुम्हारी इतनी हिम्मत हो गई है? लाइनमैन जहां कहीं भी हो, उसे बुलाकर तुरंत बिजली जुड़वाओ, वरना मैं पावर हाउस में आग लगा दूंगा।" मनीष चौहान शामली के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रहे है।
कानूनी कार्रवाई और विभागीय रुख
धमकी से सहमे जूनियर इंजीनियर सत्य प्रकाश ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। जेई का कहना है कि उन्होंने घटना के संबंध में स्थानीय थाने में तहरीर दे दी है। उन्होंने उच्चाधिकारियों को सूचित करते हुए कार्यस्थल पर भयमुक्त वातावरण की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा नेता मनीष चौहान से इस संबंध में पक्ष जानने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
गरमाई सियासत
मनीष चौहान के इस रुख के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। विपक्ष ने इस घटना को 'सत्ता की हनक' करार देते हुए सरकार को घेरा है। पुलिस अब वायरल वीडियो और जेई की तहरीर के आधार पर मामले की जांच कर रही है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकारी राजस्व की वसूली में इस तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप कर्मचारियों के मनोबल को गिराने वाला है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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