शामली: गैस किल्लत के बीच मिट्टी के तंदूरों की बढ़ी मांग, बनत के कारीगरों को मिला बड़ा ऑर्डर
शामली। जनपद में जारी रसोई गैस की किल्लत ने जहां आम जनता की रसोई का बजट और सुकून बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी ओर इस संकट ने पारंपरिक मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के लिए खुशहाली के द्वार खोल दिए हैं। गैस सिलेंडरों के लिए लग रही लंबी कतारों और बढ़ते दामों के बीच लोग अब एक बार फिर अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। घरों में अब लकड़ी के चूल्हे, अंगीठी और मिट्टी के तंदूरों की मांग अचानक बढ़ गई है।
पंजाब और हरियाणा से मिले बड़े ऑर्डर
ये भी पढ़ें शामली: रेलवे अधिकारी की तानाशाही के खिलाफ ट्रैक मैनों का हल्लाबोल, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरूगैस संकट के इस दौर में शामली के बनत कस्बे के कारीगर सतीश प्रजापति के चेहरे पर रौनक लौट आई है। सतीश को मिट्टी के तंदूर और अंगीठी बनाने के बड़े ऑर्डर प्राप्त हुए हैं। यह ऑर्डर केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि पंजाब, हरियाणा और लुधियाना जैसे बड़े शहरों से भी मिले हैं। जानकारी के अनुसार, करीब दो सौ तंदूरों की खेप तैयार कर बाहर भेजी जानी है। मांग इतनी अधिक है कि सतीश और उनके साथी कारीगर दिन-रात काम में जुटे हुए हैं।
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बाजार में इन पारंपरिक तंदूरों की मांग को देखते हुए इनकी कीमतें भी उनके आकार के आधार पर निर्धारित की गई हैं। बड़ा तंदूर लगभग एक हजार रुपये में बेचा जा रहा है, जबकि छोटे तंदूर की कीमत सात सौ रुपये तय की गई है। गांव के अन्य कारीगर भी इस काम में हाथ बंटा रहे हैं। कोई मिट्टी तैयार करने में जुटा है तो कोई तंदूर को सही आकार देने और उन्हें सुखाने के कार्य में व्यस्त है।
रोजगार के साथ सेहत का भी लाभ
बनत के ही रहने वाले डिस्ट्रीब्यूटर अशोक कुमार ने बताया कि उन्हें स्वयं करीब साठ तंदूरों की आवश्यकता है। उनका मानना है कि गैस के बढ़ते दाम और समय पर आपूर्ति न होने के कारण संपन्न घरों के लोग भी अब पुरानी पद्धति को अपना रहे हैं। जानकारों का कहना है कि मिट्टी के चूल्हे और तंदूर पर बना भोजन न केवल अधिक स्वादिष्ट होता है, बल्कि वह स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी उत्तम माना जाता है।
पारंपरिक कला को मिला नया जीवन
सतीश प्रजापति का कहना है कि काम की अधिकता के कारण अब उन्हें आराम करने तक का समय नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, वे इस बात से खुश हैं कि गैस की किल्लत ने ही सही, लेकिन उनकी पारंपरिक कला को एक बार फिर संजीवनी प्रदान की है। इस स्थिति ने जहां उपभोक्ताओं को वैकल्पिक रास्ता दिखाया है, वहीं मिट्टी का काम करने वाले परिवारों को एक मजबूत आर्थिक आधार भी प्रदान किया है।
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लेखक के बारे में
शामली के वरिष्ठ पत्रकार श्री दीपक शर्मा वर्ष 2022 से रॉयल बुलेटिन परिवार के एक निष्ठावान और कर्मठ स्तंभ के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आपने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2007 में की थी और 'सत्यभाष', 'दैनिक प्रभात', 'क्राइम न्यूज़ और नेटवर्क 10' जैसे संस्थानों में कार्य करते हुए ज़मीनी रिपोर्टिंग के गहरे अनुभव हासिल किए।
पिछले 4 वर्षों से रॉयल बुलेटिन के साथ जुड़े दीपक शर्मा वर्तमान में जिला प्रभारी (शामली) का दायित्व संभाल रहे हैं। जिले की राजनीतिक नब्ज और सामाजिक मुद्दों पर उनकी पकड़ बेजोड़ है। शामली जिले की खबरों, जन-समस्याओं और संवाद हेतु आप उनसे मोबाइल नंबर 8273275027 पर संपर्क कर सकते हैं।

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