भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की सख्त कार्रवाई, एसबीआई के लोन अधिकारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
नई दिल्ली/गुवाहाटी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जांच एजेंसी ने असम के कामरूप (ग्रामीण) जिले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की गुमी ब्रांच के असिस्टेंट मैनेजर/लोन ऑफिसर को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह मामला 12.03.2026 को ही दर्ज किया गया था, जिसके बाद यह गिरफ्तारी हुई। सीबीआई के अनुसार, आरोपी अधिकारी ने ग्राहकों के रूफटॉप सोलर इलेक्ट्रिफिकेशन (छत पर सौर ऊर्जा व्यवस्था) योजना के तहत लोन आवेदनों को प्रोसेस करने के बदले शिकायतकर्ता से 16,000 रुपए की रिश्वत/अनुचित लाभ की मांग की थी।
सरकारी योजनाओं के तहत सौर ऊर्जा लोन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दिए जाते हैं, लेकिन अधिकारी ने इसे व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने सतर्कता जाल बिछाया। आरोपी ने शिकायतकर्ता से 16,000 रुपए की राशि मांगी और स्वीकार की, जिसके दौरान उसे रंगे हाथों पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के ठिकानों पर तलाशी ली गई, जिसमें संबंधित दस्तावेज और अन्य सबूत जब्त किए गए। सीबीआई ने आरोपी को गुवाहाटी की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया, जहां से उसे रिमांड या न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा। जांच जारी है और आगे के सबूत जुटाए जा रहे हैं।
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यह मामला भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें रिश्वत मांगना और लेना दोनों अपराध हैं। यह घटना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाती है। रूफटॉप सोलर योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को सस्ती बिजली और सब्सिडी मिलती है। लेकिन ऐसे मामलों से योजना की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। सीबीआई ने हाल के वर्षों में बैंकिंग क्षेत्र में रिश्वत और धोखाधड़ी के कई मामले पकड़े हैं, जिसमें असम में भी कई बैंक अधिकारी शामिल रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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