एप्सटीन फाइल्स का खुलासा रोकने और अडानी को मुकदमे से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने देश की संप्रभुता गिरवी रखी: गरीब दास
पटना । बिहार युवा कांग्रेस के अध्यक्ष शिव प्रकाश गरीब दास ने शुक्रवार को कहा कि एप्सटीन फाइल्स का खुलासा रोकने और अडानी को मुकदमे से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने देश की संप्रभुता गिरवी रख दी है।दास ने कहा कि यौन अपराधी एप्सटीन का नाम छोटी बच्चियों के यौन शोषण से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि एप्सटीन फाइल्स के खुलासों से दुनिया भर में हड़कंप है। उन्होंने कहा कि यह हमारे देश के लिए शर्म की बात ये है कि एप्सटीन फाइल्स में हमारे देश के शीर्ष नेताओं के साथ उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस के नेता ने कहा कि उद्योगपति गौतम अडानी पर अमेरिकी अदालत में मुकदमे चल रहे हैं और मोदी सरकार अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए अडानी को अमेरिकी अदालत के नोटिस नहीं दे रही है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इन्हीं स्थितियों का फायदा उठाते हुए भारत के साथ ब्लैकमेल करना शुरू किया और उस पर ट्रेड डील थोप दी गई। उन्होंने कहा कि एप्सटीन फाइल्स के खुलासों को रोकने और अडानी को अमेरिकी अदालतों से बचाने के लिए देश के किसानों और देश की संप्रभुता की बली दे दी गई। दास ने कहा कि इस ट्रेड डील से भारत का कृषि बाजार अमेरिका के लिए खुल जाएगा। इस ट्रेड डील से भारत के उत्पादों पर अमेरिका 18 प्रतिशत टैक्स वसूलेगा जबकि भारत में आने वाले उसके उत्पादों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। जाहिर है उनके उत्पाद भारत में बहुत सस्ते होंगे और इन उत्पादों के सामने भारतीय उत्पाद महंगे होंगे।
गरीब दास ने आरोप लगाया कि इस ट्रेड डील से 140 करोड़ भारतीयों का डाटा अमेरिका को सौंपा जाएगा। जो कि देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा होगा। गरीब दास ने कहा कि इस ब्लैकमेलिंग का ही नतीजा है कि अमेरिका ने रूस, इरान और खाड़ी देशों से पेट्रोलियम खरीद पर रोक लगा दी। जबकि उन देशों से भारत को सस्ता पेट्रोलियम मिल रहा था। इस ब्लैकमेलिंग का ही नतीजा है कि भारत अब अमेरिकी आदेश का मोहताज हो गया है। अमेरिका ये तय कर रहा है कि भारत कौन सा व्यापार किस देश से करेगा।उन्होंने कहा कि अजीब विडम्बना है कि भारत की विदेश नीति अब ट्रंप तय कर रहे हैं। गरीब दास ने कहा कि कांग्रेस का संघर्ष अमेरिकी ट्रेड डील के खिलाफ जारी रहेगा और इसे खत्म करवाने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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