दिल्ली दंगा को लेकर कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर संबंधी याचिका खारिज
नई दिल्ली। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी है। एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने ये आदेश दिया।
इसके पहले एडिशनल जुडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश को कपिल मिश्रा ने सेशंस कोर्ट में चुनौती दी थी। जिसके बाद सेशंस कोर्ट ने कपिल मिश्रा की मजिस्ट्रेट कोर्ट की ओर से जांच के आदेश को निरस्त कर दिया था। इस बीच पूर्ववर्ती मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया का ट्रांसफर हो गया। अब ये मामला मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार के समक्ष चल रहा है। अश्विनी पंवार ने एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी है। अब इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से साक्ष्य पेश किए जाएंगे।
ये भी पढ़ें रिलायंस और ट्रंप का ऐतिहासिक '300 अरब डॉलर' का समझौता: अमेरिका में लगेगी 50 साल की पहली नई रिफाइनरीइसके पहले कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा था कि या तो जांच अधिकारी ने कपिल मिश्रा के खिलाफ कोई जांच नहीं की या उसने कपिल मिश्रा के खिलाफ आरोपों को छिपाने की कोशिश की।
कोर्ट ने कहा कि आरोपित कपिल मिश्रा सार्वजनिक व्यक्ति हैं और उसके बारे में ज्यादा जांच की जरुरत है। क्योंकि ऐसे लोग जनता के मत को सीधे-सीधे प्रभावित करते हैं। सार्वजनिक जीवन जीने वाले व्यक्ति से संविधान के दायरे में रहने की उम्मीद की जाती है। कपिल मिश्रा ने साल 2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर करावल नगर विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी, जिसके बाद दिल्ली सरकार के कानून मंत्री बनाये गए थे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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