विजय माल्या ने इंग्लैंड से वापसी में जताई 'असमर्थता', बॉम्बे हाईकोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल को दिया जवाब दाखिल करने का निर्देश
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट में मंगलवार को विजय माल्या से जुड़ी दो अहम याचिकाओं पर सुनवाई हुई। इस दौरान माल्या के वकील ने अदालत को बताया कि वह यह स्पष्ट नहीं कर सकते कि भारत कब लौट पाएंगे, क्योंकि इंग्लैंड की अदालतों ने उनके देश छोड़ने पर रोक लगा रखी है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड़ की खंडपीठ के समक्ष हुई। माल्या की ओर से दायर याचिकाओं में उन्हें “फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर” घोषित किए जाने को चुनौती दी गई। साथ ही उस आदेश को भी चुनौती दी गई है जिसमें उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया था। माल्या की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में याचिकाएं याचिकाकर्ता की गैरहाजिरी में भी सुनी गई हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही इंग्लैंड में जारी है और अदालत के आदेश के कारण वह बाहर नहीं जा सकते।
ये भी पढ़ें कानपुर: घरेलू कलह के बाद घर में मिले महिला और बच्चे का शव, रेलवे ट्रैक पर मिला रिटायर्ड फौजी का शवहालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने माल्या की अदालत में पेश होने की मंशा पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा कि माल्या इंग्लैंड की अदालत के आदेशों का हवाला दे रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उन्होंने उन आदेशों को चुनौती दी है या नहीं। अदालत ने इसे एक बहाने के रूप में देखा। सुनवाई के दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि वे माल्या के हलफनामे पर जवाब दाखिल करें। पीठ ने यह भी कहा कि अदालत में आज जो बयान दिए गए हैं, उन्हें शपथपत्र के रूप में दाखिल किया जाए ताकि उन्हें रिकॉर्ड पर लिया जा सके और केंद्र सरकार भी उस पर अपना जवाब दाखिल कर सके। खंडपीठ ने आगे की कार्यवाही के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ये याचिकाएं वर्ष 2019 से लंबित हैं और याचिकाकर्ता की ओर से इनके शीघ्र निपटारे के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की गई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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