लोकसभा में जारी गतिरोध थमा, शशि थरूर ने बजट चर्चा में उठाए अमेरिकी व्यापार समझौते और बेरोजगारी पर सवाल
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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में जारी गतिरोध समाप्त होने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में आम बजट 2026 पर चर्चा की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने सरकारी खर्च में कमी और कर राजस्व संग्रह में ठहराव की आलोचना की।
केरल की तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से निर्वाचित शशि थरूर ने किसानों को दी जाने वाली पीएम किसान सम्मान निधि (पीएमकेवाई) की राशि बढ़ाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सरकार को दो हजार रुपये की आर्थिक मदद को बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा को बदल कर बनाए गए वीबी जी राम जी कानून पर भी सवाल उठाए।
थरूर ने कहा कि शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी दर लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। स्मार्ट सिटी योजना की घोषणा के बाद समय-सीमा बार-बार बढ़ती रही, लेकिन जमीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। उन्होंने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए और कहा कि भारत का व्यापार फायदा 45 अरब डॉलर है, लेकिन हमने यह डील कर ली कि अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेंगे। यह निश्चित क्रय प्रतिबद्धता भारत के हित में नहीं है और दीर्घकाल में नुकसानदायक साबित होगी।
उन्होंने कहा कि वाणिज्य और विदेश मंत्री को इस समझौते की टाइमलाइन और अन्य सवालों के जवाब देने चाहिए। ग़ालिब के एक मशहूर शेर का हवाला देते हुए थरूर ने कहा, 'हमें मालूम है जन्नत की हकीकत मगर दिल बहलाने के लिए गालिब खयाल अच्छा है।'
उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल स्लोगन से नहीं बनेगा बल्कि अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं की डिलीवरी से बनेगा। यही हमारा कर्तव्य है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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