बागपत। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आज बागपत कलेक्ट्रेट परिसर में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी एवं संविधान निर्माता बाबा साहब अंबेडकर जी की भव्य एवं बड़े आकार की कलात्मक संरचना को स्थापित किया गया है जो जिला प्रशासन की पहल है कि कलेक्ट्रेट में आने वाला प्रत्येक नागरिक राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभाने के लिए प्रेरित हों।
कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रशासनिक भवन में प्रवेश के समीप ही यह दोनों आकर्षक रूप में आर्ट इंस्टॉल किए गए है जिनके माध्यम से बागपत प्रशासन ने इन दोनों महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। इसे इलस्ट्रेशन आर्ट के रूप में वुड प्लास्टिक कंपोजिट शीट से तैयार किया गया है जिसकी विशेषता यह है कि खुले प्रांगण में सामान्य रूप से देखने पर यह केवल रेखाएं दिखाई देती है लेकिन दृष्टि केंद्रित करने पर दोनों महान व्यक्तित्वों के सजीव चित्र सामने उभरकर आते है। आधुनिक कला और परम्परागत भावबोध के समन्वय से तैयार यह आर्ट दृश्य सौंदर्य को बढ़ाती है। इसके चारों ओर गमलों में पौधे लगाए गए है। परिसर में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति स्वयं रुककर इस कला को निहारने के लिए प्रेरित हो रहा है और लोग मोबाइल कैमरों में इसे कैद कर रहे है।
इस प्रकार की कला आमतौर पर बड़े शहरों और संस्थानों के मुख्यालयों में नजर आती है लेकिन इतिहास में रचे बसे और भविष्य की आकांक्षाओं से सिंचित बागपत के प्रशासनिक भवन कलेक्ट्रेट में स्थापित यह कला जीवंतता एवं प्रशासनिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका लोकार्पण जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने किया ताकि कलेक्ट्रेट में आने वाले लोग प्रेरणा पा सके और राष्ट्रपिता एवं संविधान निर्माता सदैव लोगों को देश के प्रति कर्तव्यों की याद दिलाए। स्मार्ट सिटी की तर्ज पर बदल रहे बागपत जनपद में यह पहल विशेष है।
इसके पूर्व जिलाधिकारी अस्मिता लाल के नेतृत्व में कई सराहनीय पहल साकार हुई जिसमें गौरीपुर मोड़ पर संविधान पढ़ती बेटी का स्टैचू, बड़ौत नगर पालिका में बनी संविधान की विशाल प्रतिकृति एवं स्वदेशी का प्रतीक चरखा और नागरिक अधिकारों के बोर्ड, जिलेभर में खुले में रखे ट्रांसफॉर्मर्स की सुरक्षा एवं शहरों की सुंदरता बढ़ाने हेतु उनके चारों ओर आकर्षक डिजाइन की बैरिकेडिंग की गई थी जिस पर विकसित नगर निकाय, विकसित भारत का संदेश अंकित था। वहीं कायाकल्प के संकल्प के साथ विभिन्न विद्यालयों का स्वरूप मिशन मोड में बदला गया है।
बागपत कलेक्ट्रेट में स्थापित नया कैफे भी इसी प्रशासनिक इच्छाशक्ति और प्रतिबद्धता का परिणाम है। जनपद के प्राचीन नाम व्याघ्रप्रस्थ को नई पहचान देता वाटर कियोस्क भी कलेक्ट्रेट, संविधान पार्क बड़ौत सहित कई स्थानों पर स्थापित होकर गर्व से बागपत के इतिहास की गाथा सुना रहा है। इसके अतिरिक्त जनपद बागपत के आइकॉनिक स्थल पुरा महादेव मंदिर की थीम पर बने स्मृति चिन्ह का प्रयोग विशिष्ट लोगों को सम्मान प्रतीक के रूप में किया जा रहा है जो अपने साथ इस रचनात्मक मोमेंटो पाकर पुन: बागपत लौट आने का आमंत्रण पा रहे है।
उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस, राजकीय वृक्ष अशोक, राजकीय पशु बारहसिंगा और राजकीय नृत्य विद्या कथक को यूपी के मैप पर दर्शाता स्मृति चिन्ह अपनाना, बागपत के आधुनिक एवं पारंपरिकता को दर्शाता लोगो लॉन्च करना जैसे कई सकारात्मक नवाचारी पहल शामिल करना है।
टिप्पणियां