जातीय सम्मेलनों पर रोक के बावजूद लखनऊ में लोध सम्मेलन, मंत्री मंच पर—क्या अब नोटिस की बारी?
लखनऊ। प्रदेश में जातीय सम्मेलनों पर रोक के सरकारी आदेशों के बीच आज आयोजित लोध सम्मेलन ने उत्तर प्रदेश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि जिन ब्राह्मण विधायकों को बैठक करने पर नोटिस मिला, क्या वही पैमाना अब लोध सम्मेलन पर भी लागू होगा?
उत्तर प्रदेश सरकार ने पहले ही स्पष्ट आदेश जारी कर रखे हैं कि प्रदेश में जातियों के नाम पर सम्मेलन और राजनीतिक जमावड़े नहीं होंगे। इसी आदेश के तहत बीते दिनों ब्राह्मण समाज से जुड़े विधायकों की बैठक पर उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए विधायकों को नोटिस जारी किया था और जवाब तलब किया था।
लेकिन अब वही सवाल लखनऊ में आयोजित लोध सम्मेलन को लेकर उठ खड़ा हुआ है। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह समेत कई दिग्गज भाजपा नेता शामिल हुए। सम्मेलन के मंच से सामाजिक एकजुटता और राजनीतिक भागीदारी के संदेश दिए गए, लेकिन विपक्ष ही नहीं, पार्टी के भीतर भी इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि—
क्या अब लोध सम्मेलन में शामिल मंत्रियों और नेताओं से भी जवाब मांगा जाएगा?
या फिर जातीय सम्मेलनों पर रोक का आदेश केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित है?
इस सम्मेलन को हाल ही में महोबा में मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और विधायक बृजभूषण उर्फ गुड्डू भैया राजपूत के बीच हुए विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इसके बाद लोध समाज में राजनीतिक एकजुटता दिखाने की कोशिश तेज हुई है।
गौरतलब है कि लोध और कुर्मी, दोनों ही उत्तर प्रदेश की बड़ी पिछड़ी जातियां हैं। प्रदेश की राजनीति में इनका प्रभावी वोट बैंक है और विधायकों की संख्या भी अच्छी खासी है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों ही जातियां अपने प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए खुलकर शक्ति प्रदर्शन कर रही हैं।
एक तरफ सरकार जातीय राजनीति से दूरी बनाने का संदेश दे रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि 2027 की तैयारी में हर जाति अपना राजनीतिक वजन तौलने में जुटी है।
अब देखना यह होगा कि—
क्या लोध सम्मेलन पर भी वही सख्ती दिखाई जाएगी, जो ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर हुई थी?
या फिर यह मामला भी राजनीतिक संतुलन की भेंट चढ़ जाएगा।
2027 के रण में कौन जाति कितनी ताकत दिखा पाएगी, इस पर फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं।
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