उत्तर प्रदेश विधानसभा में उस समय हलचल मच गई जब समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर ने खेल मंत्री को लेकर तंज कस दिया। उन्होंने कहा, “कभी मंत्री जी ने गिल्ली-डंडा तक नहीं खेला, और आज वो प्रदेश के खेल मंत्री हैं।”
वहीं सत्ता पक्ष ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए इसे व्यक्तिगत टिप्पणी करार दिया और कहा कि प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व कौशल किसी भी विभाग को संभालने के लिए पर्याप्त होते हैं।
इस घटना के बाद यह बहस तेज हो गई है कि क्या किसी मंत्री के लिए संबंधित क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव अनिवार्य होना चाहिए, या शासन संचालन की व्यापक समझ ही पर्याप्त है।

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