यूपी में फर्जी वोटों पर सर्जिकल स्ट्राइक: SIR प्रक्रिया के तहत 3.23 करोड़ नोटिस, 27 फरवरी तक होगी सुनवाई
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को त्रुटिरहित, अपडेट और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत सुनवाई प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सोमवार को बताया कि व्यापक स्तर पर जारी नोटिसों की तामील और सुनवाई का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। 6 जनवरी को प्रकाशित आलेख्य मतदाता सूची में नो-मैपिंग से संबंधित 1 करोड़ 4 लाख तथा तार्किक विसंगतियों से संबंधित 2 करोड़ 22 लाख मतदाताओं सहित कुल 3 करोड़ 26 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने हैं।
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इनमें से अब तक 3 करोड़ 23 लाख नोटिस निर्गत किए जा चुके हैं, जो इस महाअभियान की प्रगति को दर्शाता है। नोटिसों में से 1 करोड़ 58 लाख से अधिक नोटिस संबंधित मतदाताओं को बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा प्राप्त कराए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 90 लाख मामलों में अधिसूचित अधिकारियों द्वारा सुनवाई भी पूरी कर ली गई है। निर्वाचन विभाग का दावा है कि शेष मामलों में भी सुनवाई की प्रक्रिया लगातार जारी है और इसे समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि इस व्यापक प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने और मतदाताओं को सुविधा प्रदान करने के लिए प्रदेशभर में कुल 13,161 अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इनमें 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) और 12,758 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि एसआईआर की शुरुआत में प्रदेश में केवल 2,042 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी कार्यरत थे। इसके बाद अधिसूचना दिनांक 30 दिसंबर 2025 के माध्यम से 6,948 एईआरओ और 13 फरवरी 2026 की अधिसूचना के तहत 3,768 अतिरिक्त एईआरओ की नियुक्ति की गई, जिससे सुनवाई और सत्यापन प्रक्रिया को गति मिली है। नवदीप रिणवा ने कहा कि वर्ष 2003 के एसआईआर से मैपिंग न होने के कारण 1.04 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे मतदाताओं को सुनवाई के दौरान आयोग द्वारा निर्धारित जन्मतिथि और/या जन्मस्थान से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने होंगे। वहीं, तार्किक विसंगतियों से जुड़े 2.22 करोड़ मतदाताओं को केवल संबंधी अभिलेख प्रस्तुत करने की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि मतदाता निर्धारित तिथि पर स्वयं उपस्थित होकर अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, निष्पक्षता और मतदाताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए संचालित की जा रही है, ताकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन सुनिश्चित की जा सके। 27 फरवरी तक चलने वाली इस सुनवाई के बाद 6 मार्च को अंतिम सूची जारी होगी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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