योगी सरकार का माफिया राज पर प्रहार: 5000 करोड़ की संपत्ति जब्त, 200 से अधिक ढेर..सत्ता और अपराधियों में बढ़ी दूरी

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अर्चना सिंह Picture


लखनऊ । लंबे समय तक अपराध, माफिया राज और कमजोर कानून-व्यवस्था के लिए कुख्यात रहे उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले आम धारणा थी कि सत्ता के संरक्षण में अपराधी और माफिया तत्वों के आतंक को मिटाना नामुमकिन है मगर योगी आदित्यनाथ के हाथ में प्रदेश की बागडोर आते ही सरकार ने कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता घोषित किया और स्पष्ट संदेश दिया कि “अपराधी या तो जेल जाएगा या प्रदेश छोड़ेगा”। यह बयान केवल राजनीतिक नारा नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई का आधार बना।


प्रदेश में एक समय ऐसा था जब संगठित अपराध, भू-माफिया, खनन माफिया, शराब माफिया और बाहुबली राजनीति व्यवस्था पर हावी माने जाते थे। आम नागरिक की सुरक्षा, महिलाओं की स्थिति और कमजोर वर्गों का भरोसा लगातार सवालों के घेरे में रहता था। पुलिस पर राजनीतिक दबाव, कमजोर जांच, लंबित मुकदमे और गवाहों की सुरक्षा का अभाव, ये सभी समस्याएं कानून-व्यवस्था को कमजोर बनाती थीं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा उपलब्ध रिपोर्ट (2023, जो 2025 में प्रकाशित हुई) के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल अपराध दर राष्ट्रीय औसत से कम रही। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यूपी देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश की अपराध दर 335.3 प्रति लाख जनसंख्या रही, जबकि देश का राष्ट्रीय औसत 448.3 दर्ज किया गया। इस प्रकार, उत्तर प्रदेश की अपराध दर राष्ट्रीय औसत से लगभग 25 प्रतिशत कम है।

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एनसीआरबी की रिपोर्ट में अपराध दर के आधार पर राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश को 11वाँ स्थान मिला है। तुलना के लिए, देश में सबसे अधिक अपराध दर केरल (1631.2) और दिल्ली (1602) में दर्ज की गई। वर्ष 2017 से 2025 के बीच 240 से अधिक कुख्यात अपराधी/माफिया पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। सरकार ने अब तक चिह्नित माफियाओं की ₹5,000 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्तियों को कुर्क या ध्वस्त किया है।

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बीते आठ वर्षों में प्रदेश में 14,973 पुलिस ऑपरेशन (मुठभेड़) किए गए, जिनके दौरान 30,694 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इन कार्रवाइयों में पुलिस पर हमला करने वाले 9,467 अपराधियों को पैर में गोली लगी, जबकि 240 से अधिक अपराधी मुठभेड़ों में मारे गए। हजारों अपराधी घायल होकर गिरफ्तार हुए, जिन्हें आमतौर पर “हाफ एनकाउंटर” कहा जाता है।
गैंगस्टर एक्ट, एनएसए और सख्त धाराओं के तहत बड़ी संख्या में माफियाओं पर कार्रवाई हुई। इसके साथ ही अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई, करोड़ों की संपत्ति कुर्की और आर्थिक रीढ़ तोड़ने की नीति अपनाई गई। जिसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव यह हुआ कि अपराधियों में कानून का भय और आम जनता में सुरक्षा का भरोसा बढ़ा।

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2025 में यूपी पुलिस द्वारा किए गए इनकाउंटरों की एकीकृत आधिकारिक संख्या अलग से जारी नहीं की गई, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 9 कुख्यात अपराधी इस वर्ष मुठभेड़ों में मारे गए। बलात्कार जैसे अपराध समाज के लिए सबसे संवेदनशील विषय हैं। उत्तर प्रदेश में दर्ज मामलों की संख्या अधिक दिखाई देती है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि पहले बड़ी संख्या में मामले दर्ज ही नहीं होते थे, अब रिपोर्टिंग बढ़ना जागरूकता और भरोसे का संकेत भी है। यही हाल एससी/एसटी उत्पीड़न के मामले भी रहा।


2025 में अवैध नशे के कारोबार पर भी सख्त कार्रवाई हुई। कोडीन युक्त कफ सिरप, स्मैक और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस और एसटीएफ ने बड़े अभियान चलाए। कई जिलों में कोडीन सिरप कांड ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अपराध के गठजोड़ की ओर ध्यान खींचा। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए एफआईआर, लाइसेंस निरस्तीकरण और आपूर्ति श्रृंखला की जांच के निर्देश दिए।
2025 का सबसे चिंताजनक पहलू तथाकथित ‘व्हाइट कोट’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा रहा। जांच एजेंसियों के अनुसार, कुछ चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों पर आतंकी नेटवर्क को लॉजिस्टिक और तकनीकी सहयोग देने के आरोप लगे, जिनका कथित संबंध 10 नवंबर के दिल्ली ब्लास्ट से जोड़ा गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई व्यक्तियों की भूमिका के आधार पर है, न कि पूरे चिकित्सा पेशे के खिलाफ। इस मामले ने आंतरिक सुरक्षा और पेशेवर संस्थानों की निगरानी पर नई बहस छेड़ दी।


2025 में पुलिसिंग को आधुनिक बनाने पर भी जोर रहा, स्मार्ट पुलिसिंग, डिजिटल एफआईआर और सीसीटीएनएस, सीसीटीवी नेटवर्क, ड्रोन और साइबर सेल के विस्तार से अपराध नियंत्रण और प्रतिक्रिया समय में सुधार का दावा किया गया। वहीं मिशन शक्ति, 112 हेल्पलाइन, पिंक पुलिस, महिला थाने और फास्ट-ट्रैक कोर्ट ने कई मामलों में त्वरित राहत दी। फिर भी सामाजिक स्तर पर रोकथाम और त्वरित न्याय की जरूरत बनी हुई है।


कुल मिलाकर योगी सरकार का क्राइम कंट्रोल मॉडल सख्ती, तकनीक व प्रशासनिक इच्छाशक्ति ने यह संदेश जरूर दिया है कि अपराधी अब सिस्टम से डरता है। आने वाले वर्षों की चुनौती यह होगी कि इस सख्ती के साथ संवैधानिक मूल्यों, पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया का संतुलन बनाए रखा जाए।

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