फर्रुखाबाद में भाजपा की नई कार्यकारिणी घोषित होते ही पार्टी में फूटने लगे बगावत के स्वर

फर्रुखाबाद। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नई जिला कार्यकारिणी के गठन के बाद फर्रुखाबाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। संगठन के भीतर ही असंतोष के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं। खासकर पिछड़े और दलित वर्ग से जुड़े नेताओं में निराशा और उपेक्षा की भावना देखी जा रही है।
सामाजिक संतुलन पर उठे सवाल
जिले में भाजपा के घोषित 24 सदस्यीय कार्यकारिणी में से 16 पदाधिकारी सवर्ण समाज हैं, जिससे संगठन में सामाजिक संतुलन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सोशल मीडिया पर भी कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है।
पूर्व पदाधिकारी ने उठाए सवाल
भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह ने सोशल मीडिया पर जिला उपाध्यक्ष संदेश राजपूत को लेकर टिप्पणी करते हुए कार्यकारिणी गठन पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि “जमीनी और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर नए चेहरों को तरजीह देना संगठन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग के नेताओं को अपेक्षित प्रतिनिधित्व न मिलने की बात भी सामने आ रही है। जय गंगवार और सुनील रावत जैसे नेताओं को टीम में स्थान न मिलने से उनके समर्थकों में खासा असंतोष है। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि संगठन सामाजिक समीकरण साधने में कहीं न कहीं चूक गया है।
जिलाध्यक्ष फतेहचंद राजपूत ने बताया कि कार्यकारिणी में वास्तव में 21 सदस्य ही शामिल हैं। 3 पद (आईटी संयोजक, मीडिया सह प्रभारी, कार्यालय प्रभारी) पदेन होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जय गंगवार का नाम जिला महामंत्री पद के लिए भेजा गया था, लेकिन उनके चीनी मिल में पदस्थ होने के कारण उन्हें शामिल नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि पार्टी में कही कोई असंतोष नही है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा की इस नई कार्यकारिणी को लेकर जनपद में सियासी चर्चाएं चरम पर हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी इस असंतोष को समय रहते दूर नहीं करती, तो इसका असर आने वाले चुनावों में संगठन की एकजुटता और रणनीति पर पड़ना तय है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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