इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: संभल प्रशासन का आदेश रद्द, मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित नहीं कर सकती सरकार

प्रयागराज/संभल। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिला प्रशासन के उस विवादास्पद आदेश को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या को सीमित करने की बात कही गई थी। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय को अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक इबादत करने से रोकना राज्य का अधिकार नहीं है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह नमाज के समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करे।
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ये भी पढ़ें जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लखनऊ मुख्यालय में अग्नि नियंत्रण सेल सक्रिय सुनवाई के दौरान अदालत ने संभल के जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक केके विश्नोई को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन मस्जिद के भीतर इबादत करने वालों की संख्या तय नहीं कर सकता। यदि जिले के आला अधिकारियों को लगता है कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना स्थानांतरण करवा लेना चाहिए। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि नागरिकों को सुरक्षा देना राज्य का कर्तव्य है, न कि उनके धार्मिक अधिकारों पर पाबंदी लगाना।
निजी संपत्ति पर इजाजत की जरूरत नहीं
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई धार्मिक स्थल निजी संपत्ति पर स्थित है, तो वहां प्रार्थना के लिए राज्य से किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। राज्य का हस्तक्षेप केवल वहीं अनिवार्य है जहां सार्वजनिक भूमि का उपयोग किया जा रहा हो। यह याचिका संभल निवासी मुनाजिर खान द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि फरवरी 2024 में पुलिस ने मस्जिद में केवल 20 लोगों के नमाज पढ़ने का मौखिक आदेश दिया था, जिससे रमजान के पवित्र महीने में अकीदतमंदों को भारी परेशानी हो रही थी।
प्रशासन के तर्कों को कोर्ट ने किया खारिज
सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी थी कि इलाके में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के मद्देनजर नमाजियों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करना पुलिस की जिम्मेदारी है, न कि इबादत पर रोक लगाना। कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि कोई भी व्यक्ति नमाज में बाधा डालने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
क्या है पूरा मामला?
हयातनगर गांव की लगभग 2700 की आबादी के बीच करीब 450 वर्गफीट में यह मस्जिद स्थित है। प्रशासन के अनुसार, राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज है। याचिककर्ता ने 18 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर 16 मार्च को यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया। इस फैसले के बाद अब रमजान के दौरान मस्जिद में नमाजियों की संख्या पर लगी पाबंदी हट गई है।
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