सहारनपुर के काष्ठ कला उद्योग में लौटेगी रौनक: PM मोदी की कूटनीति के आगे झुके ट्रंप, टैरिफ घटाया, व्यापारी हुए खुश
अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा से सहारनपुर के निर्यातकों में जश्न का माहौल; 8 महीने से मंदी की मार झेल रहे हस्तशिल्प कारोबार को मिला 'जीवनदान'
सहारनपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कूटनीतिक और वाणिज्यिक प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और ऐतिहासिक सफलता मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देते हुए टैरिफ (Tariff) के मुद्दे पर अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। अमेरिका ने पिछले वर्ष अगस्त में भारतीय उत्पादों पर बढ़ाए गए 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर अब मात्र 18 फीसदी कर दिया है। इस घोषणा से सहारनपुर के विश्व प्रसिद्ध काष्ठ हस्तशिल्प (Wood Craft) उद्योग में उल्लास की लहर दौड़ गई है।
सहारनपुर का लकड़ी उद्योग, जो सालाना सात से आठ हजार करोड़ का कारोबार करता है, पिछले आठ-नौ महीनों से भारी आर्थिक मंदी की चपेट में था। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने के कारण यहां के निर्यातकों को "लकवा" मार गया था। ग्रेटर नोएडा की पिछली प्रदर्शनियों में उद्यमी खाली हाथ बैठे रहे थे, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों का सबसे बड़ा खरीदार है। हालांकि हाल ही में यूरोपीय देशों ने टैरिफ शून्य किया था, लेकिन अमेरिका की भरपाई कोई और देश नहीं कर सकता। ट्रंप की इस नई घोषणा ने अब लाखों कारीगरों के जीवन में उम्मीद जगाई है।
निर्यातक बोले- 'अमेरिकी ग्राहक की ताकत का कोई विकल्प नहीं'
सहारनपुर की प्रमुख निर्यातक फर्म 'रोनन एंड अरशद' की ओनर रजिया सुल्तान और पार्टनर अरशद व अजहर सैफी ने बताया कि अमेरिकी ग्राहक की खरीदने की ताकत दुनिया में सबसे ज्यादा है। वे भारतीय हस्तकला को ऊंचे दामों पर खरीदते हैं। पीतल, कपड़ा और चमड़ा उद्योग की तरह काष्ठ कला भी पूरी तरह अमेरिका पर निर्भर है। पिछले कुछ महीनों में कई फर्में दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गई थीं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी की इस सफलता ने सबको उबार लिया है।
कारीगरों में नई जान: अब 14 फरवरी की प्रदर्शनी पर टिकी निगाहें
विश्व प्रसिद्ध हस्तकला कारीगर मोहम्मद असलम सैफी ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह लाखों कारीगरों को नया जीवन देने जैसा है। अब 14 फरवरी से ग्रेटर नोएडा में होने वाली प्रदर्शनी में नई आशा और चमक दिखेगी। इससे पहले 5 फरवरी से जर्मनी में शुरू हो रही प्रदर्शनी में भी अब भारतीय निर्यातकों का पलड़ा भारी रहेगा और यूरोपीय देशों की 'बार्गेनिंग' (मोलभाव) का दबाव भी कम होगा।
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लेखक के बारे में
गौरव सिंघल सहारनपुर के एक अनुभवी और प्रतिष्ठित पत्रकार हैं, जो पिछले 18 वर्षों (2007 से) से मीडिया जगत में सक्रिय हैं। पत्रकारिता की बारीकियां उन्होंने विरासत में अपने पिता के मार्गदर्शन में 'अमर उजाला' और 'हिन्दुस्तान' जैसे संस्थानों से सीखीं।
अपने लंबे करियर में उन्होंने इंडिया टुडे (फोटो जर्नलिस्ट), शुक्रवार, इतवार, दैनिक संवाद और यूपी बुलेटिन जैसे दर्जनों प्रतिष्ठित समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में अपनी सेवाएं दीं। लेखनी के साथ-साथ कुशल फोटो जर्नलिस्ट के रूप में भी उनकी विशिष्ट पहचान है।
विभिन्न राष्ट्रीय व क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में अनुभव प्राप्त करने के बाद, वर्तमान में गौरव सिंघल सहारनपुर से 'रॉयल बुलेटिन' के साथ जुड़कर अपनी निष्पक्ष और गहरी रिपोर्टिंग से संस्थान को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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