आलू के बाद जायद मक्का की खेती से बढ़ाएं मुनाफा जानें सही बुवाई और उत्पादन का वैज्ञानिक तरीका
अगर आपने अभी हाल ही में आलू की फसल की खुदाई की है और सोच रहे हैं कि अगली फसल कौन सी लगाई जाए तो जायद सीजन में मक्का की खेती आपके लिए बेहतरीन विकल्प बन सकती है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल सही तकनीक अपनाने पर अच्छा उत्पादन और बेहतर लाभ दे सकती है। कई बार जल्दबाजी में की गई बुवाई से पैदावार कम हो जाती है इसलिए जरूरी है कि हर कदम वैज्ञानिक तरीके से उठाया जाए।
खेत की सही तैयारी से ही मिलेगा अच्छा उत्पादन
आलू की खुदाई के बाद खेत में बचे अवशेष और खरपतवार को पूरी तरह साफ करना बहुत जरूरी है। इसके बाद एक गहरी जुताई करें ताकि मिट्टी पलट जाए और कीट व रोगजनक नष्ट हो सकें। फिर दो बार हल्की जुताई कर पाटा लगाएं जिससे खेत भुरभुरा और समतल बन जाए।
अगर संभव हो तो आठ से दस टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती पोषण अच्छा मिलता है। अच्छी तैयारी ही अधिक उत्पादन की नींव होती है।
बुवाई में दूरी और गहराई का रखें खास ध्यान
मक्का की बुवाई करते समय कतार से कतार की दूरी सामान्य किस्मों में साठ से सत्तर सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी बीस से पच्चीस सेंटीमीटर रखना उचित माना जाता है। हाइब्रिड किस्मों के लिए कतार की दूरी सत्तर से पचहत्तर सेंटीमीटर तक रखी जा सकती है। बीज को चार से पांच सेंटीमीटर गहराई पर बोना चाहिए ताकि अंकुरण मजबूत और समान रूप से हो सके।
ये भी पढ़ें लाल गोभी की खेती से 110 दिन में लाखों की कमाई, गर्मी में हाई वैल्यू फसल से किसानों को बड़ा फायदाअक्सर दूरी का सही पालन न करने से पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और दानों का विकास भी कम हो सकता है। इसलिए नापतौल कर बुवाई करना ही समझदारी है।
मेड पर बुवाई से बढ़ता है फायदा
विशेषज्ञों के अनुसार मेड बनाकर बुवाई करना अधिक लाभकारी साबित हो सकता है। साठ से सत्तर सेंटीमीटर की दूरी पर मेड बनाएं और बीज को मेड के ऊपरी भाग पर बोएं। इससे जल निकासी बेहतर होती है और पानी भराव की समस्या नहीं रहती। जड़ों का विकास अच्छा होता है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं।
मेड पद्धति में नालियों के माध्यम से सिंचाई करना आसान होता है जिससे पानी की बचत भी होती है। यह तरीका खासकर उन क्षेत्रों में उपयोगी है जहां गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता सीमित रहती है।
संतुलित उर्वरक और समय पर देखभाल से बढ़ेगा मुनाफा
समय पर निंदाई गुड़ाई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन मक्का की फसल को मजबूत बनाता है। शुरुआती अवस्था में पौधों की देखभाल पर ध्यान देने से दाने भरपूर और गुणवत्ता बेहतर मिलती है। वैज्ञानिक तरीके अपनाने से कम समय में अधिक उत्पादन लिया जा सकता है और जायद सीजन को लाभदायक बनाया जा सकता है।
आलू के बाद मक्का की खेती अपनाकर खेत खाली नहीं रहता और अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है। सही तकनीक और समझदारी से किया गया प्रबंधन आ
पकी मेहनत को दोगुना फल दे सकता है।
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