स्वीट कॉर्न की खेती, 90 दिन में तैयार होने वाली फसल, कम लागत में लाख तक की आमदनी
आज खेती की दुनिया से एक ऐसी प्रेरक कहानी सामने आ रही है जो यह दिखाती है कि फसल का सही चुनाव किसान की आमदनी को नई दिशा दे सकता है। बीते कुछ वर्षों में कई किसानों ने पारंपरिक मक्का की जगह स्वीट कॉर्न की खेती को अपनाया और उन्हें उत्पादन के साथ मुनाफे में भी बड़ा फर्क देखने को मिला। स्वीट कॉर्न की बढ़ती मांग और तेज बिक्री ने इसे किसानों के लिए भरोसेमंद विकल्प बना दिया है।
साधारण मक्का से अलग क्यों है स्वीट कॉर्न
कम समय में तैयार होने वाली फसल
स्वीट कॉर्न की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है। इसकी बुवाई के बाद लगभग सत्तर से नब्बे दिनों में फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है। अगर किसान सर्दियों के मौसम में सही समय पर इसकी बुवाई करते हैं तो उत्पादन भी अच्छा होता है और बाजार भाव भी बेहतर मिलता है।
लागत और आमदनी का संतुलन
स्वीट कॉर्न की खेती में लागत बहुत ज्यादा नहीं आती। आधे एकड़ से भी कम जमीन में इसकी खेती पर लगभग बीस हजार रुपये तक का खर्च आता है। इससे पच्चीस से तीस क्विंटल तक उत्पादन लिया जा सकता है। थोक बाजार में इसका औसत भाव चालीस से पैंतालीस रुपये प्रति किलो तक रहता है। इस तरह किसान एक फसल से करीब एक लाख रुपये तक की आमदनी कर सकता है जो पारंपरिक मक्का की तुलना में कई गुना ज्यादा है।
बाजार में बिक्री और मांग
स्वीट कॉर्न की बिक्री में ज्यादा परेशानी नहीं होती। थोक बाजारों में इसकी नियमित मांग रहती है। होटल ढाबा और फूड इंडस्ट्री में इसका उपयोग बढ़ने से किसानों को फसल बेचने में आसानी होती है। यही कारण है कि यह फसल तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
कीट प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन
स्वीट कॉर्न की खेती में फल छेदक कीट का प्रकोप देखने को मिल सकता है। यदि समय रहते जैविक कीटनाशकों का उपयोग किया जाए तो फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है। सही देखभाल और समय पर उपचार से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होती हैं।
स्वीट कॉर्न की खेती उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प बन सकती है जो कम समय में अच्छी आमदनी चाहते हैं। कम लागत तेज तैयार होने वाली फसल और अच्छा बाजार मूल्य इसे खेती का स्मार्ट तरीका बनाते हैं। अगर किसान सही तकनीक और समय का ध्यान रखें तो यह फसल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती है।
Disclaimer यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। खेती से जुड़ी लागत उत्पादन और बाजार भाव स्थान और समय के अनुसार बदल सकते हैं। फसल लगाने से पहले कृषि विशेषज्ञ या स्थानीय बाजार से जानकारी जरूर प्राप्त करें।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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