मचान विधि से टमाटर की खेती 1 बीघा में 1 लाख लागत और कई गुना मुनाफा ऑर्गेनिक फसल से छप्परफाड़ कमाई
अगर आप पढ़ाई के साथ साथ खेती से कमाई करने का सपना देख रहे हैं तो यह कहानी आपको जरूर प्रेरित करेगी। पूर्वांचल में खेती को जीवन रेखा माना जाता है लेकिन आज के युवा पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर नई तकनीक अपना रहे हैं। इसी सोच के साथ एक युवा ने मचान विधि से टमाटर की खेती शुरू की और आज यह प्रयोग एक सफल व्यवसाय बन चुका है।
मचान विधि से बदली खेती की तस्वीर
साधारण गेहूं या आलू की जगह टमाटर की उन्नत खेती का फैसला लिया गया। मचान विधि अपनाई गई जिसमें पौधों को ऊपर उठाकर बांस और रस्सी की मदद से सहारा दिया जाता है। इससे पौधे जमीन से ऊपर रहते हैं और फल अधिक मात्रा में लगते हैं।
टमाटर की बेली किंग और अविनाश वैरायटी को चुना गया क्योंकि इनका फल आकार में अच्छा और स्वाद में देसी जैसा होता है। एक टमाटर का वजन लगभग 80 से 90 ग्राम तक पहुंचता है। पौधों की लंबाई 5 से 6 फुट तक हो जाती है जिससे प्रति पौधा अधिक उत्पादन मिलता है।
तीन महीने बाद शुरू हुई तुड़ाई
पौधरोपण सितंबर महीने में किया गया और लगभग तीन महीने बाद फल की तुड़ाई शुरू हो गई। एक बीघा क्षेत्र में खेती की गई जिसकी लागत करीब एक लाख रुपये आई। शुरुआत में यह निवेश बड़ा लग सकता है लेकिन उत्पादन ने इस लागत को कई गुना तक पार कर दिया।
अब तक 100 कैरेट से अधिक टमाटर बाजार में बेचे जा चुके हैं। एक कैरेट में 25 किलो टमाटर आता है। हर दूसरे दिन तुड़ाई की जाती है जिसमें दो से ढाई कुंतल तक उत्पादन मिल जाता है। लगातार हो रही तुड़ाई से नियमित आय बनी हुई है।
बाजार में जबरदस्त मांग और बेहतर दाम
यह फसल पूरी तरह से ऑर्गेनिक तरीके से तैयार की गई है। स्वाद बेहतर और देसी जैसा होने के कारण बाजार में इसकी मांग ज्यादा है। टमाटर लगभग 300 रुपये प्रति कैरेट के भाव से बिक रहा है। बाजार में पहुंचते ही माल आसानी से बिक जाता है।
हालांकि इस खेती में देखभाल बहुत जरूरी है। कीटों से बचाव और पौधों की सही ग्रोथ के लिए नियमित निगरानी करनी पड़ती है। लेकिन मेहनत का फल मीठा होता है और यही मेहनत आज शानदार मुनाफे में बदल चुकी है।
युवाओं के लिए नई राह
पढ़ाई के साथ खेती करना आसान नहीं होता लेकिन सही योजना और नई तकनीक अपनाकर इसे सफल बनाया जा सकता है। मचान विधि से टमाटर की खेती कम जमीन में ज्यादा उत्पादन देती है। यदि कोई किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमाना चाहता है तो यह मॉडल अपनाकर अच्छी कमाई कर सकता है।
यह उदाहरण बताता है कि खेती सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि एक स्मार्ट बिजनेस भी बन सकती है। सही समय पर रोपण सही वैरायटी का चुनाव और बाजार की मांग को समझकर खेती को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है।
Disclaimer : यह लेख सामान्य जानकारीके उद्देश्य से तैयार किया गया है। खेती में लागत और मुनाफा स्थान मौसम और बाजार भाव के अनुसार बदल सकते हैं। किसी भी फसल की शुरुआत से पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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