रंगीन फूलगोभी की खेती का कमाल कम लागत में तिगुना मुनाफा ,जैविक तरीके से बढ़ती बाजार मांग , खेती का सुनहरा मौका
अगर आप खेती में कुछ नया करने की सोच रहे हैं और पारंपरिक फसलों से हटकर बेहतर कमाई का रास्ता तलाश रहे हैं तो यह खबर आपके लिए प्रेरणा बन सकती है। आजकल सिर्फ सफेद या हरी फूलगोभी ही नहीं बल्कि नीली बैंगनी पीली और नारंगी रंग की फूलगोभी भी बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। खास बात यह है कि इन रंगीन किस्मों की देखभाल सामान्य गोभी की तरह ही की जाती है और फिर भी इनसे दो से तीन गुना तक ज्यादा कीमत मिल सकती है।
जैविक तरीके से हो रही है खेती
रंगीन फूलगोभी की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति से की जा रही है। इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों से दूरी रखी जाती है। खेत की तैयारी के दौरान गोबर खाद मुर्गी खाद नीम खली और सरसों खली का उपयोग किया जाता है जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। समय समय पर जीवामृत का प्रयोग कर फसल को पोषक तत्व दिए जाते हैं। फंगस और अन्य रोगों से बचाव के लिए ट्राइकोडर्मा और तांबा युक्त छाछ का छिड़काव किया जाता है। कीट नियंत्रण के लिए नीम ऑयल और दशपर्णी अर्क जैसे जैविक घोल का इस्तेमाल किया जाता है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर रहती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।
पोषण से भरपूर और सेहत के लिए फायदेमंद
रंगीन फूलगोभी में अलग अलग प्रकार के प्राकृतिक पिगमेंट पाए जाते हैं जो इसे खास बनाते हैं। बैंगनी रंग की गोभी में एंथोसाइनिन तत्व होता है जो शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है। नारंगी रंग की किस्म में बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो सेहत के लिए अच्छा होता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इन रंगीन किस्मों में सामान्य सफेद गोभी की तुलना में अधिक पोषक तत्व होते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग अब इन सब्जियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
बीज महंगे लेकिन मुनाफा कई गुना
रंगीन फूलगोभी के बीज सामान्य किस्मों की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं। हालांकि बाजार में इसकी कीमत दो से तीन गुना अधिक मिलती है जिससे लागत आसानी से निकल जाती है और अच्छा लाभ होता है। बढ़ती मांग के कारण बाजार में इसकी खपत भी तेजी से बढ़ रही है। यह उन किसानों के लिए सुनहरा अवसर है जो कम समय में ज्यादा आय चाहते हैं।
देखभाल में नहीं कोई अतिरिक्त मेहनत
सबसे अच्छी बात यह है कि रंगीन फूलगोभी की देखभाल सामान्य सफेद गोभी की तरह ही की जाती है। सिंचाई निराई गुड़ाई और पोषण प्रबंधन की प्रक्रिया लगभग समान है। यानी अतिरिक्त मेहनत किए बिना किसान ज्यादा कमाई कर सकते हैं। यही वजह है कि यह खेती किसानों के लिए आकर्षक विकल्प बनती जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान पारंपरिक खेती के साथ साथ रंगीन फूलगोभी जैसी नई किस्मों को अपनाएं तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। आने वाले समय में रंगीन और पोषण से भरपूर सब्जियों की मांग और बढ़ने की संभावना है जिससे किसानों को स्थायी लाभ मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य कृषि जानकारी पर आधारित है। खेती शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या विभाग से सलाह अवश्य लें।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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