Multi Cropping Technique से कमाई चार गुना तक, फरवरी में भिंडी के साथ मूली पालक चुकंदर की सहफसली खेती बनेगी मुनाफे का नया रास्ता
आज खेती सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि समझदारी और नई तकनीक का खेल बन चुकी है। जो किसान समय और जमीन का सही उपयोग कर रहे हैं वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसी ही एक तकनीक है मल्टी क्रॉपिंग जिसे सहफसली खेती भी कहा जाता है। इस तरीके से एक ही खेत में एक साथ कई फसलें उगाकर आमदनी को चार गुना तक बढ़ाया जा सकता है। बस जरूरत है सही मौसम सही मिट्टी और सही फसल चयन की।
फरवरी का मौसम क्यों है सबसे अनुकूल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फरवरी का महीना अगेती भिंडी की खेती के लिए बेहद उपयुक्त माना जाता है। इस समय तापमान संतुलित रहता है जिससे फसल की बढ़वार तेज और स्वस्थ होती है। अगर भिंडी को मुख्य फसल के रूप में लगाया जाए और उसके साथ मूली पालक धनिया और चुकंदर जैसी सहफसलें उगाई जाएं तो जमीन का हर हिस्सा उपयोग में आ जाता है।
ये भी पढ़ें फरवरी में शुरू करें किचन गार्डनिंग, जल्दी अंकुरण, मजबूत पौधे, 60 दिन में ताजी सब्जियां घर पर तैयारमूली को थोड़ी गहराई में बोया जाता है जबकि पालक और धनिया सतह के पास उगते हैं। इस तरह अलग अलग स्तर पर फसलें बढ़ती हैं और पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करती हैं।
सहफसली खेती से जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा
सहफसली खेती का मतलब है एक ही खेत में तीन या उससे अधिक फसलें एक साथ लगाना। इसमें मुख्य फसल की कतारों के बीच जल्दी तैयार होने वाली फसलें बोई जाती हैं। इससे कुल उत्पादन बढ़ता है और बाजार या मौसम के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है।
अगर किसी एक फसल का भाव कम हो जाए तो दूसरी फसल से उसकी भरपाई हो जाती है। यही कारण है कि इस तकनीक को कंपैनियन क्रॉपिंग या मल्टी क्रॉपिंग कहा जाता है। इसमें अलग अलग वृद्धि अवधि और पोषक तत्वों की मांग वाली फसलों का चयन किया जाता है ताकि सभी फसलें एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने के बजाय सहयोग करें।
30 दिनों में शुरू हो सकती है कमाई
इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान 30 दिनों के भीतर ही बाजार में सब्जियां बेचकर कमाई शुरू कर सकते हैं। मूली लगभग 25 से 30 दिनों में तैयार हो जाती है। धनिया कम जगह में एक महीने के भीतर कटाई के लिए तैयार रहता है। पालक 30 से 35 दिनों में बाजार पहुंच सकता है और चुकंदर भी जल्दी उत्पादन देने वाली फसल है।
जब एक ही खेत में तीन से चार फसलें एक साथ लगाई जाती हैं तो खाली जगह नहीं बचती। इससे जमीन का बेहतर उपयोग होता है और लागत भी कम रहती है। जल्दी पैदावार शुरू होने से नकदी प्रवाह बना रहता है और मुनाफा तेजी से बढ़ता है।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़ने का समय
आज के समय में खेती में बदलाव जरूरी है। सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। मल्टी क्रॉपिंग तकनीक अपनाकर किसान कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं। सही योजना और वैज्ञानिक तरीके से की गई सहफसली खेती भविष्य की मजबूत खेती मानी जा रही है।
अगर आप भी अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं तो इस फरवरी भिंडी के साथ मूली पालक धनिया और चुकंदर की सहफसली खेती जरूर आजमाएं। सही देखभाल और समय पर सिंचाई से यह मॉडल आपको बेहतर परिणाम दे सकता है।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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