खीरे की खेती में न करें यह बड़ी गलती वरना जमीन में ही सड़ जाएगी पूरी फसल जानिए सही वैज्ञानिक तरीका
अगर आप खीरे की खेती से कम समय में अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। खीरा ऐसी फसल है जो सही तरीके से बोई जाए तो रिकॉर्ड पैदावार दे सकती है। लेकिन अक्सर एक छोटी सी गलती पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है। खासकर बुवाई के समय की गई लापरवाही से बीज जमीन के अंदर ही खराब हो जाते हैं और अंकुरण सही से नहीं हो पाता। ऐसे में जरूरी है कि खेती को वैज्ञानिक तरीके से किया जाए।
क्यों गहरी बुवाई बन जाती है नुकसान की वजह
खीरे की फसल में सबसे आम गलती है बीज को ज्यादा गहराई पर बो देना। जब बीज बहुत नीचे चला जाता है तो उसे अंकुरित होने के लिए पर्याप्त हवा और तापमान नहीं मिल पाता। इसका परिणाम यह होता है कि बीज सड़ने लगता है और पौधा जमीन के ऊपर आ ही नहीं पाता। सही तरीका यह है कि बीज को केवल 2 सेंटीमीटर की गहराई पर बोया जाए। इससे अंकुरण तेज और समान रूप से होता है और पौधे स्वस्थ निकलते हैं।
उत्तम किस्म और बीजोपचार है सफलता की पहली सीढ़ी
खीरे की खेती में केवल अच्छी किस्म चुन लेना ही काफी नहीं है। बीजोपचार भी उतना ही जरूरी है। अगर बीज को बिना उपचार के बो दिया जाए तो मिट्टी में मौजूद रोग और कीट शुरुआती अवस्था में ही पौधों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए बुवाई से पहले बीज का उपचार करना चाहिए ताकि फसल सुरक्षित और मजबूत शुरुआत कर सके।
खेत की तैयारी में न करें लापरवाही
खीरे की अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी बेहद महत्वपूर्ण है। बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार जुताई कर मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बना लें। इससे जड़ों को फैलने में आसानी होती है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं। मिट्टी में जैविक तत्व बढ़ाने के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाना जरूरी है। यह खाद मिट्टी की संरचना सुधारती है और ह्यूमस बढ़ाती है जिससे पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं।
सही क्यारी और दूरी से मिलेगा बेहतर उत्पादन
खीरे की बुवाई 2 मीटर चौड़ी क्यारियों में करनी चाहिए। इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और देखभाल आसान हो जाती है। सही दूरी रखने से पौधों में हवा का संचार बेहतर होता है जिससे रोगों का खतरा कम होता है। सिंचाई और कीट प्रबंधन भी आसानी से किया जा सकता है। यह छोटी सी सावधानी उत्पादन को कई गुना बढ़ा सकती है।
जैविक खाद से बढ़ेगी गुणवत्ता और मुनाफा
गोबर की सड़ी हुई खाद का उपयोग न केवल उत्पादन बढ़ाता है बल्कि खीरे की गुणवत्ता भी सुधारता है। अच्छी मिट्टी में उगाए गए खीरे का आकार रंग और स्वाद बेहतर होता है जिससे बाजार में अच्छा दाम मिलता है। लागत कम रहती है और मुनाफा बढ़ता है।
खीरे की खेती में सफलता पूरी तरह वैज्ञानिक प्रबंधन पर निर्भर करती है। बीज की सही गहराई उचित क्यारी निर्माण मिट्टी की अच्छी तैयारी और जैविक खाद का उपयोग आपकी फसल को सुरक्षित और लाभकारी बना सकता है। छोटी सी गलती से पूरी फसल खराब हो सकती है इसलिए हर कदम सोच समझकर उठाएं। सही तकनीक अपनाकर आप कम समय में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
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