मार्च में खीरा की खेती से बंपर कमाई का सुनहरा मौका, Pusa Sanjog समेत उन्नत किस्मों से 50 दिन में शुरू होगा उत्पादन और मिलेगा जबरदस्त मुनाफा
अगर आप खेती से बेहतर कमाई करने की सोच रहे हैं तो फरवरी और मार्च का महीना आपके लिए सुनहरा मौका लेकर आता है। इस समय खीरा की खेती करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। मौसम का तापमान और नमी फसल की बढ़वार के लिए अनुकूल रहती है जिससे पौधे तेजी से विकसित होते हैं और कम समय में उत्पादन देना शुरू कर देते हैं। सही किस्म और वैज्ञानिक तरीका अपनाकर कम समय में अच्छी आमदनी हासिल की जा सकती है।
पूसा संजोग समेत उन्नत किस्में देंगी ज्यादा उत्पादन
विशेषज्ञों की ओर से Pusa Sanjog बालम खीरा सुवर्णा अगैती और स्वर्ण शीतल जैसी किस्मों की सिफारिश की गई है। इनमें Pusa Sanjog किस्म खास मानी जा रही है क्योंकि यह स्थानीय जलवायु के अनुकूल तैयार की गई है और बेहतर उत्पादन क्षमता रखती है।
इन उन्नत किस्मों की खासियत यह है कि इनमें फल समान आकार के होते हैं स्वाद बेहतर रहता है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। अगर बुवाई सही समय पर की जाए तो पैदावार भी अधिक मिलती है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है।
बुवाई की सही विधि से मिलेगा दोगुना फायदा
अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी होती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी तरह जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बना लेना चाहिए। मिट्टी की जांच कराकर पोषक तत्वों की कमी का पता लगाना भी फायदेमंद रहता है। उसी आधार पर खाद और उर्वरक का उपयोग करने से फसल का विकास संतुलित होता है।
कतार से कतार की दूरी करीब डेढ़ मीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग पचास सेंटीमीटर रखनी चाहिए। एक स्थान पर तीन बीज लगाने की सलाह दी जाती है। बुवाई से पहले बीज को चौबीस घंटे पानी में भिगोकर रखने से अंकुरण अच्छा होता है और पौधे मजबूत बनते हैं।
चाहें तो पहले नर्सरी में पौधे तैयार कर बाद में खेत में रोपाई भी की जा सकती है। सही दूरी और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है जिससे रोग का खतरा कम होता है और उत्पादन बढ़ता है।
जैविक खाद से बढ़ेगी मिट्टी की ताकत
खीरा की खेती में जैविक खाद का उपयोग बेहद लाभकारी माना जाता है। प्रति हेक्टेयर लगभग दो सौ कुंतल सड़ी गोबर खाद का प्रयोग किया जा सकता है। यदि वर्मी कंपोस्ट उपलब्ध हो तो दस से बारह टन प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करना फायदेमंद रहता है।
जैविक खाद के इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। बुवाई के करीब पैंतालीस से पचास दिनों के भीतर पौधों में फूल आना शुरू हो जाता है। इसके बाद जल्द ही फल लगने लगते हैं जिससे कम समय में उत्पादन मिलना शुरू हो जाता है।
कम समय में बेहतर मुनाफे का मौका
खीरा एक ऐसी सब्जी फसल है जिसकी मांग बाजार में लगातार बनी रहती है। सही समय पर बुवाई और उचित देखभाल से अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है। नियमित सिंचाई और समय पर पोषक तत्व देने से पौधे स्वस्थ रहते हैं और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
अगर वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए तो खीरा कम अवधि में तैयार होकर अच्छी आमदनी दे सकता है। फरवरी और मार्च में की गई बुवाई से गर्मी के मौसम में बढ़िया बाजार भाव मिलने की संभावना रहती है जिससे मुनाफा और भी बढ़ सकता है।
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युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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