गोरखपुर में मेगा सर्जिकल आई कैंप: मिलिट्री डॉक्टरों ने 374 मरीजों की आंखों की रोशनी वापस लाई
गोरखपुर। पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला मेगा एडवांस्ड सर्जिकल आई कैंप गोरखपुर स्थित 12 एयर फोर्स हॉस्पिटल में शुक्रवार को खत्म हुआ। इंडियन आर्मी और इंडियन एयर फोर्स के डॉक्टरों की टीम ने चार दिन के कैंप में 374 लोगों की जिंदगी बदलने वाली सर्जरी कीं। समापन समारोह में सेंट्रल एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल बी मणिकांतन शामिल हुए। इसमें डायरेक्टर जनरल आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन और डायरेक्टर जनरल मेडिकल सर्विसेज (एयर) एयर मार्शल संदीप थरेजा ने हाई-लेवल इंस्पेक्शन भी किया। यह कैंप पूरे इलाके के लिए उम्मीद की किरण बन गया।
कैंप ने सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, देवरिया, महाराजगंज और गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों के अलावा नेपाल से भी मरीजों को अपनी ओर खींचा। इस मिशन का असर गोरखपुर के रहने वाले 69 साल के अमरनाथ गुप्ता की आंखों से देखा गया। सालों से अपने पोते-पोतियों के चेहरे देखने की खुशी उनकी कमजोर नजर ने छीन ली थी। अपनी सफल सर्जरी के बाद भावुक हुए गुप्ता उन सैकड़ों लोगों में से एक हैं जिन्हें नई रोशनी मिली है। इस टीम को आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में ऑप्थैल्मोलॉजी के हेड ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा ने लीड किया, जिन्हें लेफ्टिनेंट कर्नल रवि चौहान और मेजर अमृता जोशी समेत सर्जिकल टीम का सपोर्ट मिला, जिनकी लगातार कोशिशों से कैंप को ऐतिहासिक सफलता मिली। टीम ने सर्जरी करने के लिए इंडियन एयर फोर्स के एयरक्राफ्ट से इलाके में लाए गए वर्ल्ड-क्लास मेडिकल इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया। -
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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